क्या है वीटो, जिससे मसूद अजहर को बचाता रहता है चीन, कैसे हुई थी इसकी शुरुआत ?

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रयास पर एक बार फिर चीन ने अड़ंगा लगा दिया है। सुरक्षा परिषद के चार स्थायी सदस्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने इसका समर्थन किया था जबकि चीन ने विरोध किया।

Written by Sandeep Sehgal March 14, 2019 2:36 pm

नई दिल्ली। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रयास पर एक बार फिर चीन ने अड़ंगा लगा दिया है। सुरक्षा परिषद के चार स्थायी सदस्यों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने इसका समर्थन किया था जबकि चीन ने विरोध किया।


वीटो क्या है?

Veto लैटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है ‘मैं अनुमति नहीं देता हूं’। प्राचीन रोम में कुछ निर्वाचित अधिकारियों के पास अतिरिक्त शक्ति होती थी। वे इन शक्ति का इस्तेमाल करके रोम सरकार की किसी कार्रवाई को रोक सकते थे। तब से यह शब्द किसी चीज को करने से रोकने की शक्ति के लिए इस्तेमाल होने लगा।

 

मौजूदा समय में यूएन सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों चीन, फ्रांस,रूस, यूके और अमेरिका के पास वीटो पावर है। स्थायी सदस्यों के फैसले से अगर कोई सदस्य सहमत नहीं है तो वह वीटो पावर का इस्तेमाल करके उस फैसले को रोक सकता है। यही मसूद के मामले में हुआ। सुरक्षा परिषद के चार स्थायी सदस्य उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने के समर्थन में थे लेकिन चीन उसके विरोध में था और उसने अड़ंगा लगा दिया।

इतिहास

फरवरी, 1945 में क्रीमिया, यूक्रेन के शहर याल्टा में एक सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन को याल्टा सम्मेलन या क्रीमिया सम्मेलन के नाम से जाना जाता था। इसी सम्मेलन में सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसफ स्टालिन ने वीटो पावर का प्रस्ताव रखा था। याल्टा सम्मेलन का आयोजन युद्ध बाद की योजना बनाने के लिए हुआ था।

इसमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंसटन चर्चिल, सोवियत संघ के प्रधानमंत्री जोसफ स्टालिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डी.रूजवेल्ट ने हिस्सा लिया। वैसे वीटो का यह कॉन्सेप्ट साल 1945 में ही नहीं आया। 1920 में लीग ऑफ नेशंस की स्थापना के बाद ही वीटो पावर वुजूद में आ गया था। उस समय लीग काउंसिल के स्थायी और अस्थायी सदस्यों, दोनों के पास वीटो पावर थी।

पहली बार कब हुआ इस्तेमाल

16 फरवरी, 1946 को सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ (यूएसएसआर) ने पहली बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया था। लेबनान और सीरिया से विदेशी सैनिकों की वापसी के प्रस्ताव पर यूएसएसआर ने वीटो किया था। उस समय से अब तक वीटो का 291 बार इस्तेमाल हो चुका है।

सबसे ज्यादा किसने किया इस्तेमाल?

शुरुआती सालों में सोवियत रूस ने सबसे ज्यादा वीटो का इस्तेमाल किया। अब तक यह 141 बार वीटो का इस्तेमाल कर चुका है जो अब तक के कुल वीटो का करीब आधा है।

अमेरिका ने अब तक 83 बार वीटो का इस्तेमाल किया है। पहली बार इसने 17 मार्च, 1970 को वीटो किया था। 1970 के बाद से अमेरिका ने अन्य स्थायी सदस्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल किया है। अमेरिका ने वीटो का ज्यादातर इस्तेमाल इजरायल के हितों की रक्षा के लिए किया है।

ब्रिटेन ने 32 बार इस्तेमाल किया है। पहली बार 30 अक्टूबर, 1956 को स्वेज संकट के दौरान किया था।

फ्रांस ने पहली बार 26 जून, 1946 को इसका इस्तेमाल किया था और अब तक 18 बार वीटो किया है।

चीन ने 15 बार वीटो का इस्तेमाल किया है। पहली बार 13 दिसंबर, 1955 को चीन गणराज्य (आरओसी) द्वारा किया गया था।

हालिया वीटो

13 मार्च, 2019: मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने वीटो का इस्तेमाल किया।
28 फरवरी, 2019: वेनेजुएला के राष्ट्रपति संकट के एक प्रस्ताव पर चीन और रूस ने वीटो किया।
1 जून, 2018: गाजा बॉर्डर विरोध में इजरायल द्वारा ताकत के इस्तेमाल की आलोचना के प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो किया।
10 अप्रैल, 2018: सीरिया के गृह युद्ध में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की जांच के प्रस्ताव पर रूस का वीटो।
28 फरवरी, 2017: सीरिया में रासायनिक हथियारों के प्रतिबंध पर चीन और रूस का वीटो।

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