चीन एक मजबूत राष्ट्र लेकिन भारत भी कमजोर नहीं: सेना प्रमुख

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नई दिल्ली। ‘रासायनिक, जैविक, रेटियोलॉजिकल और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरा आज वास्तविकता का रुप धारण कर रहा है।’ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आज ये बातें कहीं। वे डीआरडीओ कार्यशाला और सीबीआरएन रक्षा प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सीबीआरएन हथियारों का इस्तेमाल मानव जगत और व्यापार जगत को खतरे में डाल सकता है। जिसकी भरपाई करने में एक लंबा समय लग जाएगा। खतरनाक हथियारों से निपटने के लिए, रावत ने “सुरक्षा तकनीकों, उपकरणों और प्रणालियों को विकसित करने और सैनिकों को प्रशिक्षण प्रदान करने का सुझाव दिया।” इससे पहले भी सेना प्रमुख ने हथियारों के इस्तेमाल पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने हमेशा से हथियारों के इस्तेमाल में भी ‘मेड इन इंडिया’ पर जोर दिया है। वहीं चीन पर बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि चीन एक मजबूत राष्ट्र लेकिन भारत भी कमजोर नहीं। भारतीय सेना किसी भी मामले में चीनी सेना से उन्नीस नहीं है। चीन के बढ़ते दबाव को लेकर बिपिन रावत ने कहा कि हां, चीन हमपर दबाव डाल रहा है। हम उससे निपट रहे हैं। हम इसपर प्रयास करते रहेंगे क्योंकि हमारा उससे सीधा वास्ता है। हम अपने क्षेत्र को आतंकित नहीं होने देंगे। सेना की टुकड़ी निर्धारित है। जब भी कोई परिस्थिति सामने आएगी हमारी टुकड़ी उसका सामना करने में सक्षम है। मिलिट्री लेवल पर अगर कोई खतरा पैदा होता है तो हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए। अब हमारा ध्यान उत्तरी सीमाओं पर शिफ्ट हो गया है।सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि चीनी सैनिक डोकलाम सीमा पर मौजूद हैं, लेकिन इनकी संख्या में कमी आई है। सेना दिवस (15 जनवरी) से पहले मीडिया से बातचीत में सेना प्रमुख ने कहा कि डोकलाम में साल 2000 से सड़क निर्माण जारी है, लेकिन चीनी जवान बीते साल जून में भारत-चीन सीमा पर गतिरोध शुरू होने से पहले टोसा बाला के नजदीक आ गए। टोसा बाला उत्तर व दक्षिण डोकलाम को बांटता है।

उन्होंने कहा कि चीनी बड़ी संख्या में मजदूरों व उपकरणों के साथ आए थे।

उन्होंने कहा, “हमने महसूस किया कि वे पूरे डोकलाम पर दावा करने की कोशिश करेंगे..इससे हमारे सामने खतरा पैदा कर रहा था और यह यथास्थिति को बदल रहा था।”

जनरल रावत ने कहा कि डोकलाम के उत्तरी हिस्से में चीनी सैनिकों की मौजूदगी जारी है, लेकिन इसमें कमी आई है और सक्रियता के स्तर में भी कमी आई है।

सेना प्रमुख ने उत्तर में चीन के साथ देश की सीमा पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया।

सेना प्रमुख ने कहा, “हमें अब उत्तरी सीमा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। हमारा फोकस काफी लंबे समय से पश्चिमी सीमा पर ही रहा है।”

सीमा उल्लंघन व भारत तथा चीन के जवानों के आमने-सामने आने की घटनाओं के बढ़ने पर उन्होंने कहा कि इसकी संख्या में इसलिए बढ़ोतरी हुई है क्योंकि भारत ने सीमा से लगी अग्रिम चौकियों पर ज्यादा सैनिक तैनात किए हैं।

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