नोटबंदी के दो साल पर बोले वित्तमंत्री अरूण जेटली, ‘रुपये को जब्त कर लेना नहीं था मकसद’

नई दिल्ली। नोटबंदी के दो साल पर विपक्षी दलों की तरफ से सरकार को निशाना बनाने और प्रधानमंत्री से इसके लिए माफी की मांग के बीच केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली सरकार के इस कदम का बड़े ही जोरदार तरीके से बचाव किया है।

Union Minister Arun Jaitley

आपको बता दें, वित्त मंत्री अरूण जेटली ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से 8 नवंबर 2016 की आधी रात को पांच सौ और हजार रूपये के नोट पर बैन को “अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करने की दिशा में सरकार की तरफ से उठाए गए महत्वपूर्ण फैसलों में से एक करार दिया।”

केन्द्रीय वित्तमंत्री ने नोटबंदी के परिणाम के बारे में बताया कि कर व्यवस्था को समझना बड़ा मुश्किल हो गया था।जेटली ने आगे लिखा- “नोटबंदी को लेकर गलत आलोचना यह की जा रही है कि सारे पैसे बैंकों में जम कर लिए गए। पैसे की जब्ती करना नोटबंदी का मकसद नहीं था। अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने और कर चुकाना इसके व्यापक लक्ष्य था।”

उन्होंने कहा- “भारत को कैश से डिजिटल लेनदेन के लिए ले जाने के लिए व्यवस्था दुरूस्त करने की जरूरत थी। वास्तविक तौर पर इसका हायर टैक्स रिवैन्यू और हायर टैक्स बेस पर असर होगा।”

जोटली ने कहा नोटबंदी से टैक्स का दाय़रा बढ़ा

Union Minister Arun Jaitley

इस मौके पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के समर्थन में एक ब्लॉग लिखा है। जेटली के मुताबिक नोटबंदी से ब्लैक मनी पर लगाम लगी है साथ ही टैक्स का दायरा भी बढ़ा है। उन्होंने लिखा है कि नोटबंदी सरकार के अहम फैसलों की एक कड़ी है जो अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए जरूरी है।

जेटली के मुताबिक नोटबंदी के बाद टैक्स चोरी करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने लिखा है कि नोटबंदी की लोग ये कहते हुए आलोचना कर रहे हैं कि लगभग सारा कैश बैंकों में वापस आ गया। लेकिन नोटबंदी के सहारे हमारा मकसद सिर्फ कैश को ज़ब्त करना नहीं था। हम चाह रहे थे कि लोग टैक्स के दायरे में आए। हमें कैशलेस इकॉनमी से डिजिटल लेन-देन की दुनिया में आन था। नोटबंदी से ज़्यादा टैक्स रेवेन्यू जमा करने और टैक्स बेस को बढ़ाने में मदद मिल रही है।


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