आईआईटी-कानपुर ने बनाया ड्रोन ‘प्रहरी’

इस ड्रोन का उपयोग निगरानी से लेकर भीड़ को नियंत्रित करने में, आपातकाल में किसी चीज की आपूर्ति करने में, कृषि क्षेत्र में, बंधक व्यक्ति की स्थिति का पता लगाने में, रासायनिक और परमाणु एजेंट का पता लगाने में किया जा सकता है। यह दुश्मन ड्रोन से भी आगे निकल सकता है और उसे अपनी जाल से पकड़ सकता है।”

Written by: November 25, 2019 10:37 am

नई दिल्ली। आईआईटी-कानपुर के विद्यार्थियों ने ‘प्रहरी’ नामक ड्रोन तैयार किया है। यह ड्रोन न सिर्फ 4, 5 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है, बल्कि संवेदनशील क्षेत्र में लगातार तीन घंटे तक गश्त भी कर सकता है। इस स्वचालित सिस्टम (ड्रोन) में मानवरहित हेलीकॉप्टर की सुविधा है, जिसमें अन्य ड्रोन को पकड़ने के लिए जाल की सुविधा दी गई है। ऐसे में ‘प्रहरी’ अन्य ड्रोन का पीछा करने के साथ ही उन्हें पकड़ भी सकता है।

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इस सिस्टम को प्रोफेसर अभिषेक और एयरोस्पेस इंजीनियरिग विभाग के प्रोफेसर मंगल कोठारी और उनके विद्यार्थियों द्वारा विकसित किया गया है। इस ड्रोन में एडवांस ऑटोपायलट सिस्टम भी है और यह अन्य ड्रोन को पकड़ने के दौरान वजन के बढ़ने से खुद की इंटेरिया में हुए अचानक बदलाव को संभालने में सक्षम है।

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इसे खास तौर पर सीमा पर निगरानी रखने के लिए और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। इसके साथ ही यह सश बलों द्वारा सीमा क्षेत्रों की निगरानी रखने में मदद करने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने वाले दुश्मनों के ड्रोन को पकड़ने में भी काफी मददगार है।
हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इस ड्रोन का वीडियो ट्विटर पर साझा किया था।

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इस बारे में प्रोफेसर अभिषेक ने कहा, “इस ड्रोन का उपयोग निगरानी से लेकर भीड़ को नियंत्रित करने में, आपातकाल में किसी चीज की आपूर्ति करने में, कृषि क्षेत्र में, बंधक व्यक्ति की स्थिति का पता लगाने में, रासायनिक और परमाणु एजेंट का पता लगाने में किया जा सकता है। यह दुश्मन ड्रोन से भी आगे निकल सकता है और उसे अपनी जाल से पकड़ सकता है।”