पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में मनाई जाती है ईद-ए-मिलाद

नई दिल्ली। आज पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्मदिवस है। इस दिन को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद के तौर पर मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक इस्लाम के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख, 571ईं. के दिन ही इस्लाम के सबसे महान नबी और आखिरी पैगंबर का जन्म हुआ था। जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2018 में 21 नवंबर को है। उनकी जन्म की खुशी में मुस्लिम मस्जिदों में नमाज़ें अदा करते हैं। रातभर मोहम्मद को याद कर प्रार्थनाएं कर जुलूस निकालते हैं, मजलिसे निकालते हैं। इसके साथ ही पैगंबर मोहम्मद की दी गई शिक्षाओं और पैगामों को पढ़ा जाता है।

अधिकांश देशों में ये पर्व शुक्रवार को मनाया गया जबकि कुछ जगहों पर गुरुवार को सूर्यास्त होने के साथ इसे मनाया गया। इस दिन जगह-जगह पर मुस्लिम समुदाय के लोग सभाएं करते हैं और दुआओ में पैगंबर मोहम्मद साहब को याद किया जाता है।

मक्का की पहाड़ी की गुफा, जिसे गार-ए-हिराह कहते हैं सल्ल. को वहीं पर अल्लाह ने फरिश्तों के सरदार जिब्राइल अलै. के मार्फत पवित्र संदेश  हजरत मोहम्मद साहब को अल्लाह ने एक अवतार के रूप में पृथ्वी पर भेजा था, क्योंकि उस समय अरब के लोगों के हालात बहुत खराब हो गए थे।

लोगों में शराबखोरी, जुआखोरी, लूटमार, वेश्यावृत्ति और पिछड़ापन भयंकर रूप से फैला हुआ था। कई लोग नास्तिक थे। ऐसे माहौल में मोहम्मद साहब ने जन्म लेकर लोगों को ईश्वर का संदेश दिया।

पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिवस के अवसर पर घरों और मस्ज़िदों को सजाया जाता है। नमाज़ों और संदेशों को पढ़ने के साथ-साथ गरीबों को दान दिया जाता है।

उन्हें खाना खिलाया जाता है। जो लोग मस्जिद नहीं जा पाते वो घर में कुरान को पढ़ते हैं। मान्यता है कि ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन कुरान का पाठ करने से अल्लाह का रहम बरसता है।

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