कांग्रेस के जन घोषणा पत्र में गुर्जर समेत इन जातियों को आरक्षण का वायदा…

नई दिल्ली। राजस्थान में गुर्जर समाज पिछले कई वर्षो से पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण देने की मांग करता आ रहा है। मगर संवैधानिक बंदिशों के चलते ऐसा होना सम्भव नहीं हैं। वर्तमान में गुर्जर समाज भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगा कर सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहा है। तो वहीं कांग्रेस गुर्जरों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है।बता दें कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलेट स्वयं गुर्जर समाज से आते हैं। इस कारण वो गुर्जर समाज को यह समझाने का प्रयास कर रहें है कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो वो मुख्यमंत्री बनने के प्रबल दावेदार हैं। यदि वो मुख्यमंत्री बनते हैं तो गुर्जर समाज का प्रदेश में पहला मुख्यमंत्री होगा। एक बार वो मुख्यमंत्री बन गए तो समाज की सभी समस्यायें सुलझा देंगें। जैसे उनके पिता राजेश पायलट ने हिमाचल प्रदेश में गुर्जर समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करवाकर लाभ दिलाया था। कुछ वैसा ही लाभ वो राजस्थान के गुर्जरों को भी दिलवा देंगे।राजस्थान कांग्रेस में हर सीट पर दावेदारों की लंबी लाइन लगी है। कांग्रेस टिकट का हर दावेदार मान कर चल रहा है कि टिकट मिलते ही उसकी जीत पक्की है। ऐसे में टिकटों की दौड़ में एकदूसरे की जमकर टांग खिंचाई की जा रही है। प्रतिद्वंद्वियों के गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं। इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में कहा है कि वो गुर्जर, रायका, बंजारा, गाड़िया लुआर को विशेष पिछड़े वर्ग (एसबीसी) का पांच प्रतिशत आरक्षण कानूनी रूप से मिले यह सुनिश्चित करने के लिए संकल्पबद्ध है। पार्टी वृद्धावस्था पेंशन योजना की विसंगतियों को दूर करते हुए पेंशन राशि को 500 रूपये से बढ़ाकर 750 रुपये व 750 रुपये से बढाकर 1000 रुपये करेगी।

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि ये घोषणापत्र राज्य की जनता की जनभावनाओं, उनकी अपेक्षाओं व आंकाक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसके लिए पार्टी को ऑफलाइन व ऑनलाइन लगभग दो लाख सुझाव मिले थे।sachin pilot 1ये भी कहा जा रहा है कि सचिन पायलट ने साढ़े चार साल संघर्ष कर कांग्रेस को प्रदेश में सरकार बनाने के मुकालबे में ला खड़ा किया है तो मुख्यमंत्री का हक उन्हीं का बनता है। गहलोत तो वैसे भी चार साल तक शांत बैठे थे अब कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनता देख चुनाव के समय सक्रिय हुए हैं।

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