अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई 217 पन्नो की पुनर्विचार याचिका, मस्जिद फिर से बनाने की मांग

मौलाना सैयद असद रशीदी अयोध्या जमीन विवाद के  मूल पक्षकार एम सिद्दीकी के वैधानिक उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।

Written by: December 2, 2019 5:01 pm

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी गई है। इसे अयोध्या विवाद के पक्षकार असद रशीदी की ओर से दाखिल किया गया है। यह रिव्यू पिटिशन 217 पन्नों की है।

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मौलाना सैयद असद रशीदी अयोध्या जमीन विवाद के  मूल पक्षकार एम सिद्दीकी के वैधानिक उत्तराधिकारी हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। इस फैसले में यह जमीन रामलला को दी गई थी। इस पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 1934, 1949 और 1992 में मुस्लिम समुदाय के साथ हुई   नाइन्साफ़ी को गैरकानूनी करार दिया है। इसके बावजूद  उसे नजरअंदाज किया गया।

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इस मामले में  पूर्ण न्याय तभी होता जब मस्जिद का पुनर्निर्माण होता। याचिका में यह भी कहा गया है कि विवादित ढाँचा हमेशा ही मस्जिद था और उस पर मुसलमानों का एकाधिकार रहा है। कोर्ट ने माना है कि वहां नमाज होती थी, फिर भी मुसलमानों को बाहर कर दिया गया।

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याचिका में कहा गया है कि साल 1949 में अवैध तरीके से इमारत में मूर्ति रखी गई, फिर भी रामलला को पूरी जगह दे दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल पवार 142 का इस्तेमाल कर पूर्ण न्याय की बात कही मगर पूर्ण न्याय तभी होता जब सुप्रीम कोर्ट मस्जिद बनाने का आदेश देता। इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी जल्दी ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा।