राफेल निर्माता कंपनी दसॉल्ट और मोदी सरकार के बीच यह है करार

मोदी सरकार ने पिछली यूपीए सरकार की 126 राफेल खरीदने की प्रतिबद्धता से पीछे हटकर कहा कि डबल इंजन वाले विमान बहुत महंगे होंगे और यह समझौता भारत और फ्रांस के बीच लगभग एक दशक लंबी वार्ता के बाद हुआ।

Written by: November 14, 2019 2:25 pm

नई दिल्ली। भारतीय वासुसेना को मजबूती दिलाने के लिए केंद्री की मोदी सरकार ने फ्रांस के साथ बेमिसाल राफेल विमान का सौदा किया है और इस विमान के आ जाने के बाद कोई भी दुश्मन भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं करेगा। हालांकि, राफेल विमान के सौदे को लेकर विपक्षी पार्टियों ने विवाद खड़ा किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये साफ कर दिया कि, इस डील में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है।

Rafale Deal and Supreme Court

राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट से विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने आज राफेल मामले में केंद्र  की मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस सौदे की जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते हैं।

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क्या है दसॉल्ट और मोदी सरकार के बीच करार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2015 में घोषणा की थी कि भारत फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी से 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदेगा। इसके बाद सितंबर 2016 में भारत ने 7.87 बिलियन यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपये) में 36 नए राफले लड़ाकू जेट खरीदने के लिए फ्रांसीसी सरकार के साथ सीधा सौदा किया। राफेल को 2012 में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और रूस से प्रतिद्वंद्वी प्रस्तावों पर चुना गया था।

rafale air craft

मूल योजना यह थी कि भारत फ्रांस से 18 ऑफ द शेल्फ जेट खरीदेगा। मोदी सरकार ने पिछली यूपीए सरकार की 126 राफेल खरीदने की प्रतिबद्धता से पीछे हटकर कहा कि डबल इंजन वाले विमान बहुत महंगे होंगे और यह समझौता भारत और फ्रांस के बीच लगभग एक दशक लंबी वार्ता के बाद हुआ।