महाराष्ट्र की सियासत पर अमित शाह का जवाब, दिया पहला रिएक्शन

उन्होंने शिवसेना को साफतौर से जवाब देते हुए कहा कि, चुनाव प्रचार के दौरान मैंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार ये कहा था कि, ‘अगर हमारा गठबंधन जीतता है तो फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही होंगे’।

Written by: November 13, 2019 7:14 pm

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जारी गतिरोध के बीच शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस विधायकों से मुलाकात की और साथ ही इस मुलाकात के बाद सरकार बनाने की कवायद भी तेज हो गई है। इसी बीच गृहमंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र की सियासत पर अपना पहला रिएक्शन दिया है।

Amit shah

उन्होंने शिवसेना को साफतौर से जवाब देते हुए कहा कि, चुनाव प्रचार के दौरान मैंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार ये कहा था कि, ‘अगर हमारा गठबंधन जीतता है तो फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही होंगे’। उन्होंने आगे कहा कि, ‘उस वक्त किसी ने भी इस बात पर आपत्ति नहीं जताई थी। अब वो नई मांगे लेकर आए हैं, जो हमें स्वीकार नही’


साथ ही शाह ने कहा कि इससे पहले किसी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए 18 दिन जितना समय नहीं दिया था। राज्यपाल ने विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद ही पार्टियों को आमंत्रित किया। न तो शिवसेना और न ही कांग्रेस-राकांपा ने दावा किया और न ही हमने। अगर आज भी किसी पार्टी के पास संख्या है तो वह राज्यपाल से संपर्क कर सकती है।

गृहमंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी एएनआई से महाराष्ट्र में चल रहे सियासी घमासान को लेकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि इससे पहले किसी भी राज्य में इतना समया नहीं दिया गया था। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए 18 दिन दिए गए थे। राज्यपाल ने विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद ही पार्टियों को आमंत्रित किया।

Amit Shah

उन्होंने आगे कहा कि, सरकार बनाने को लेकर ना तो हमने दावा किया, ना शिवसेना और ना ही कांग्रेस और एनसीपी ने। अगर आज भी किसी पार्टी के पास संख्या है तो वह राज्यपाल से संपर्क कर सकती है. हमें शिवसेना की शर्तें मंजूर नहीं हैं।

Sonia Gandhi Sharad Pawar Uddhav

आपको बता दें, महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम दिवाली से पहले ही आ गया था। इसके बाद से लगातार सरकार बनाने को लेकर पार्टियों के बीच बातें चल रही थी। हालांकि इस दौरान भाजपा और शिवसेना के बीच कई सारी बातों को लेकर तकरार हो गई, जिसके बाद दोनों पार्टियों की राह अलग हो गई।

shivsena

इसके बाद शिवसेना अपनी विरोधी पार्टी कांग्रेस और एनसीपी के साथ जा कर सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद शिवसेना और एनसीपी ने इस पर सवाल खड़े किए थे और इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच गई थी।