अमेरिका और तालिबान की नौ राउंड की बातचीत में ऐसा क्या हुआ कि भारत मुस्कुरा और पाकिस्तान तिलमिला उठा

नौ राउंड की बातचीत के बाद अमेरिका ने तालिबान के साथ समझौता करने से इंकार कर दिया है। पाकिस्तान के लिए यह बहुत बड़ा सदमा है। पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान के साथ डील करने के नाम पर अमेरिकी मदद लेता आया है।

Written by: September 5, 2019 6:18 pm

नई दिल्ली। अफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान के बीच चल रही बातचीत खटाई में पड़ गई है। नौ राउंड की बातचीत के बाद अमेरिका ने तालिबान के साथ समझौता करने से इंकार कर दिया है। पाकिस्तान के लिए यह बहुत बड़ा सदमा है। पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान के साथ डील करने के नाम पर अमेरिकी मदद लेता आया है।

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वह कश्मीर के मामले में भी इसी शर्त पर अमेरिका से मदद की गुहार करता आया है। मगर अब उसकी ये उम्मीद भी टूट गई। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने अपने विशेष दूत को तालिबान के शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। अमेरिका को इस समझौते में अपने पक्ष में कुछ भी नजर नहीं आया। न ही इसमें अलकायदा के खिलाफ लड़ाई का कोई ब्लूप्रिंट था और न ही अफगानिस्तान में अमेरिका के समर्थन वाली सरकार को स्थापित करने के बारे में कोई वादा।

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इस सिलसिले में लंबे समय से तालिबान और अमेरिका की बातें चल रही थीं। नौ राउंड की बातचीत हो चुकी थी मगर अफगानिस्तान पर अमेरिका के विशेष दूत जलमै खलीलजाद ने इस समझौते का हिस्सा बनने से मना कर दिया। अमेरिका अफगानिस्तान में शांति स्थापित कर वहां से अपनी सेनाएं वापस बुलाने की फिराक में है।

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राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले चुनाव में इस आशय का वादा भी किया था। मगर तालिबान ने अभी तक अफगानिस्तान में युद्ध को समाप्त करने की कोई गारंटी नहीं दी है। उल्टे वह अपनी सरकार स्थापित करने पर दबाव डाल रहा है। पाकिस्तान तालिबान को अमेरिका के पक्ष में झुकाने के नाम पर ही अमेरिकी मदद हासिल करता आया है। ऐसे में इस समझौते का न हो पाना पाकिस्तान के लिए बड़ा सदमा है।