अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष ने अब लिया 134 साल पुराने फैसले का सहारा, दिलचस्प हुई बहस 

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। मुस्लिम पक्ष ने बहस करते हुए 134 साल पुराने कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। मुस्लिम पक्ष ने उस फैसले के हवाले से यह भी कहा कि अब हिंदुओं का इस पर कोई अधिकार नहीं बनता है।

Written by: October 14, 2019 3:31 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। मुस्लिम पक्ष ने बहस करते हुए 134 साल पुराने कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। मुस्लिम पक्ष ने उस फैसले के हवाले से यह भी कहा कि अब हिंदुओं का इस पर कोई अधिकार नहीं बनता है। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट को इस सिलसिले में तीन नोट सौंपे गए।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि मस्जिद पर अवैध कब्जा किया गया था। इसके बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। धवन ने अवैध कब्जे पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला भी दिया।

Ayodhya-

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने तर्क दिया कि कोर्ट ने साल 1885 और 1886 में  इस सिलसिले में हिंदुओं के दावे को खारिज कर दिया था। राजीव धवन ने कहा कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में यह बात सामने नहीं आई है कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनायी गई थी। धवन ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर यह भी कहा  कि विभाग सिर्फ विशेष राय देता है। उसे पुख्ता नहीं माना जा सकता।

उनके मुताबिक एएसआई की रिपोर्ट में किसी मंदिर के ध्वस्त करने की बात नही कही गई है। राजीव धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की तरफ की तरह से जिन फैसलों के हवाले दिए गए, उसमे तथ्य सही नही थे। हिदुओं के पास कभी भी कब्ज़ा नही रहा। वह बाहर चबूतरे पर पूजा करते थे।