यूपी खनन घोटाले में ईडी की बड़ी कार्यवाही, 11 बड़े अफसर नपे, बढ़ सकती है अखिलेश यादव की मुश्किलें

उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले में ईडी ने 11 अफसरों पर केस दर्ज किया है। सीबीआई पहले भी इस मामले कई अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर छापेमारी कर चुकी है।

Written by: November 12, 2019 2:02 pm

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले में ईडी ने 11 अफसरों पर केस दर्ज किया है। सीबीआई पहले भी इस मामले कई अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर छापेमारी कर चुकी है। ईडी ने जिन अफसरों के खिलाफ केस दर्ज किया है वे बड़े पदों पर रह चुके हैं और पिछली अखिलेश सरकार के वक्त काफी प्रभावशाली हुआ करते थे।

Akhilesh Yadav

उत्तर प्रदेश के 4 जिलों के 8 आईएएस अफसरों पर ईडी ने शिकंजा कसा है। ईडी ने सहारनपुर के पूर्व डीएम पवन कुमार पर केस दर्ज किया है। जिन दूसरे आईएएस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है उनमे बी चंद्रकला पूर्व डीएम हमीरपुर, अभय सिंह पूर्व डीएम फतेहपुर, विवेक पूर्व डीएम देवरिया,

Enforcement Directorate

आईएएस देवी शरण उपाध्याय, आईएएस संतोष राय पूर्व विशेष सचिव खनन व आईएएस जीवेश नंदन पूर्व प्रमुख सचिव खनन शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो 2012 और 2016 के बीच कुल 22 टेंडर पास किए गए थे, जो विवाद में आए। इन 22 में से 14 टेंडर तब पास किए गए थे, जब खनन मंत्रालय अखिलेश यादव के पास ही था।बाकी के मामले गायत्री प्रजापति के कार्यकाल के हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश में हुए खनन घोटाला मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शिकंजा कसा था।सीबीआई ने खनन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव जीवेश नंदन, तत्कालीन विशेष सचिव संतोष कुमार, बुलंदशहर के डीएम अभय सिंह और देवरिया के पूर्व डीएम विवेक कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया था।

Akhilesh Yadav Mining Scam

इस घोटाले की कड़ी इस तरह जुड़ती है। खनन विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव जीवेश नंदन के आदेश पर 25 जिलों के डीएम को शासनादेश भेजा गया था।शासनादेश के चलते जिलों के डीएम ने पट्टा जारी किया था। जीवेश नंदन अभी भारत सरकार में तैनात हैं। खनन घोटाले में अब तक सीबीआई ने तीन मामले दर्ज किए हैं। जिन अफसरों पर छापे पड़े हैं, सभी ने तब पट्टे बांटे थे, जब अखिलेश यादव के पास खनन मंत्रालय था। इससे अखिलेश यादव की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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अवैध खनन का मामला 2012 से 2016 के बीच का है, उस वक्त राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। तब खनन मंत्रालय का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही संभाल रहे थे।