भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने लोकसभा में बहस के दौरान नाथूराम गोडसे को बताया ‘देशभक्त’

भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में एसपीजी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का हवाला ‘देशभक्त’ के तौर पर दिया जिसको लेकर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

Avatar Written by: November 27, 2019 6:39 pm

नई दिल्ली। अभी तो साध्वी प्रज्ञा को रक्षा मंत्रालय की कमेटी में शामिल करने को लेकर बवाल थमा भी नहीं था कि साध्वी ने एक और बयान देकर पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। साध्वी ने लोकसभा चुनाव के समय नाथूराम गोडसे को लेकर दिए गए बयान को एक बार फिर लोकसभा में भी आज दोहरा दिया। इसके बाद कांग्रेस की तरफ से इस बयान को लेकर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई। कांग्रेस के नेता साध्वी के इस बयान पर लोकसभा में जमकर विरोध करने लगे।Sadhvi Pragya Thakur BJp

भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में एसपीजी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का हवाला ‘देशभक्त’ के तौर पर दिया जिसको लेकर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।Pragya Singh Thakur

सदन में जब द्रमुक सदस्य ए राजा ने चर्चा में भाग लेते हुए नकारात्मक मानसिकता को लेकर गोडसे का उदाहरण दिया तो प्रज्ञा अपने स्थान पर खड़ी हो गयीं और कहा कि ‘देशभक्तों का उदाहरण मत दीजिये’। इस पर कांग्रेस के कई सदस्यों ने आपत्ति जताई और यह आरोप लगाते हुए सुने गये कि उन्हें (प्रज्ञा) को प्रधानमंत्री का संरक्षण मिला हुआ है।pragya thakur

इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी भोपाल से भाजपा सदस्य प्रज्ञा को बैठने का इशारा करते नजर आये। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस सदस्यों से बैठने की अपील करते हुए कहा कि सिर्फ ए राजा की बात रिकॉर्ड में जा रही है।pragya thakur

प्रज्ञा सिंह इससे पहले भी गोडसे को ‘देशभक्त’ बता चुकी हैं जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि प्रज्ञा ठाकुर या जो भी इस तरह का बयान देगा उसे माफ नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा था कि गांधी जी या गोडसे के बारे में जो भी बात की गयी या जो भी बयान दिये गये, ये बहुत ही खराब हैं। उन्होंने कहा, इस तरह के बयान हर प्रकार से घृणा के लायक हैं। आलोचना के लायक हैं, सभ्य समाज के अंदर इस तरह की भाषा नहीं चलती है। इस प्रकार की सोच नहीं चल सकती। इसलिए ऐसा करने वालों को सौ बार आगे सोचना पड़ेगा।