मायावती का अखिलेश पर बड़ा आरोप-कहा वो चाहते थे मैं इस जाति वालों को टिकट न दूं

मायावती ने कहा है कि अखिलेश ने मुझे संदेश भिजवाया कि मुसलमानों को ज्यादा टिकट नहीं दूं। इसके पीछे धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण होने का तर्क दिया गया। हालांकि मैंने उनकी बात नहीं मानी।

Written by Newsroom Staff June 24, 2019 8:10 am

नई दिल्ली। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने चंद दिन पहले तक अपने गठबंधन सहयोगी रहे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर मुसलमानों को टिकट देने से मना करने का आरोप लगाया है। मायावती ने कहा है कि अखिलेश ने मुझे संदेश भिजवाया कि मुसलमानों को ज्यादा टिकट नहीं दूं। इसके पीछे धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण होने का तर्क दिया गया। हालांकि मैंने उनकी बात नहीं मानी।

Akhilesh Yadav And Mayawati

उन्होंने कहा कि अखिलेश मुसलमान विरोधी हैं और लोकसभा चुनाव 2019 में मुसलमानों को टिकट देने से डर रहे थे। मायावती ने मुलायम सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा से मिल कर ताज कॉरिडोर में उन्हें फसाने की कोशिश की। बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान सपा बसपा के बीच हुआ गठबंधन फेल होने के बाद टूट गया।

मायावती ने हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से दूरी बना ली थी और गठबंधन तोड़ने का एलान कर उपचुनाव अपने दम पर लड़ने का एलान किया था। बसपा की राष्ट्रीय स्तर की हुई बैठक में मायावती ने कहा कि गठबंधन के चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने मुझे फोन नहीं किया। सतीश मिश्रा ने उनसे कहा कि वे मुझे फोन कर लें, लेकिन फिर भी उन्होंने फोन नहीं किया। मैंने बड़े होने का फर्ज निभाया और वोटों की गिनती के दिन 23 तारीख को उन्हें फोन कर उनके परिवार के हारने पर अफसोस जताया।

mayawati

मायावती ने कहा कि तीन जून को जब मैंने दिल्ली की मीटिंग में गठबंधन तोड़ने की बात कही तब अखिलेश ने सतीष चंद्र मिश्रा को फोन किया, लेकिन तब भी मुझसे बात नहीं की। मायावती ने कहा कि अखिलेश ने मिश्रा से मुझे मैसेज भिजवाया कि मैं मुसलमानों को टिकट न दूं, क्योंकि उससे और ध्रुवीकरण होगा, लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी।

इसके साथ ही मायावती ने आरोप भी लगाया कि मुझे ताज कॉरिडोर केस में फंसाने में भाजपा के साथ मुलायम सिंह यादव का भी अहम रोल था। उन्होंने कहा कि अखिलेश की सरकार में गैर यादव और पिछड़ों के साथ नाइंसाफी हुई, इसलिए उन्होंने वोट नहीं किया। इसके अलावा सपा ने प्रमोशन में आरक्षण का विरोध किया था इसलिए दलितों, पिछड़ों ने उसे वोट नहीं दिया।