महाराष्ट्र में बदल गया मंत्रिमंडल का फॉर्मूला, एनसीपी बनेगी बड़ी पार्टी

महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी को एकसाथ मिलाने के पीछे सबसे बड़ी भूमिका शरद पवार की ही रही है। लेकिन जब महाराष्ट्र में सत्ता के बंटवारे पर उनसे सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास मुख्यमंत्री है जबकि कांग्रेस के पास स्पीकर है।

Written by: December 5, 2019 10:43 am

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार गठन हो चुका है और शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर सरकार बनाई है। तीनों पार्टियों के फॉर्मूले के तहत मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को मिला है और इसके साथ ही कांग्रेस के खाते में स्पीकर का पद गया है। ऐसे में शरद पवार की पार्टी एनसीपी को डिप्टी सीएम का पद हासिल हुआ है। लेकिन इस फॉर्मूले से शरद पवार कुछ खास खुश नहीं थे। उन्होंने बयान दिया था कि, हमें कुछ भी नहीं मिला है। अब मंत्रिमंडल के नए फॉर्मूले के तहत एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी।

sharad pawar

महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी को एकसाथ मिलाने के पीछे सबसे बड़ी भूमिका शरद पवार की ही रही है। लेकिन जब महाराष्ट्र में सत्ता के बंटवारे पर उनसे सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास मुख्यमंत्री है जबकि कांग्रेस के पास स्पीकर है। लेकिन मेरी पार्टी को क्या मिला। डिप्टी सीएम के पास कोई अधिकार नहीं होता। गौरतलब है कि संविधान के अनुसार डिप्टी सीएम का कोई पद नहीं होता है, यह सिर्फ एक कैबिनेट मंत्री के बराबर ही होता है।

पवार के पावर पंच ने कर दिया काम?

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शरद पवार का ये बयान जैसे ही सामने आया तो महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हुई। राजनीतिक गलियारों में बात ये भी हुई कि शरद पवार अपने सहयोगियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इसको लेकर साफ तौर पर कुछ नहीं कहा। लेकिन बुधवार शाम होते-होते महाराष्ट्र से नया फॉर्मूला सामने आया कि अब मंत्रिमंडल में एनसीपी को सबसे ज्यादा जगह मिली है।

नए फॉर्मूले के अनुसार, महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में एनसीपी को 16, शिवसेना को 15 और कांग्रेस को 12 मंत्रालय मिले हैं। अगर विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो कांग्रेस के पास 44, एनसीपी के पास 54 और शिवसेना के पास 56 विधायक हैं। इससे पहले सत्ता के बंटवारे के अनुसार, शिवसेना को मुख्यमंत्री पद, कांग्रेस को स्पीकर और एनसीपी को डिप्टी सीएम का पद मिला था।

किसे साधने में जुटे हैं शरद पवार?

sharad pawar and sanjay raut

मंत्रालय को लेकर दबाव बनाकर शरद पवार ने फैसला लेने की गेंद को शिवसेना-कांग्रेस के पाले में डाल दिया था। लेकिन शरद पवार किसे घेरना चाह रहे हैं, ये कुछ साफ नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि मंत्रालय को लेकर शिवसेना के साथ उनकी कोई दिक्कत नहीं है, जो भी है कांग्रेस-एनसीपी के बीच की बात है। क्योंकि कांग्रेस के पास शिवसेना-एनसीपी से काफी कम सीटें हैं, फिर भी कांग्रेस की ओर से सत्ता में बराबर भागीदारी की बात कही जा रही थी।