नागरिकता संशोधन बिल के पास होने के बाद से मणिपुर में जश्न जारी

जहां एक तरफ नागरिकता संशोधन विधेयक के राज्यसभा से पारित होने के बाद से हीं पूर्वोत्तर के राज्यों में जमकर बवाल मचा है वहीं मणिपुर में इस बिल के पास होने के बाद से ही लोग जश्न मना रहे हैं।

Written by: December 12, 2019 4:51 pm

नई दिल्ली। जहां एक तरफ नागरिकता संशोधन विधेयक के राज्यसभा से पारित होने के बाद से हीं पूर्वोत्तर के राज्यों में जमकर बवाल मचा है वहीं मणिपुर में इस बिल के पास होने के बाद से ही लोग जश्न मना रहे हैं। मणिपुर में केंद्र सरकार के द्वारा पारित कराए गए इस बिल का विरोध नहीं किया जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार की तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि यहां इनर लाइन परमिट लागू किया जाएगा। जिसको लेकर केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। इसकी मांग काफी लंबे समय से मणिपुर के लोग कर रहे थे।Manipur TH Radheyshyam

मणिपुर में नागरिकता संशोधन बिल के पारित होने के बाद से ही लोग सड़क पर उतरकर जश्न मना रहे हैं। इसकी एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब तेजी से वायरल हो रही है। इस वीडियो में मणिपुर सरकार के शिक्षा, श्रम और रोजगार मंत्री थोकचॉग राधेश्याम सिंह स्थानीय लोगों के साथ जश्न मनाते दिख रहे हैं।Celebration in Manipur

इस वीडियो को पोस्ट करते हुए थोकचॉग राधेश्याम सिंह ने लिखा कि हमारे माननीय गृह मंत्री द्वारा लिए गए क्रांतिकारी निर्णय के बाद अमित शाह ने राज्य में इनर लाइन परमिट सिस्टम के कार्यान्वयन का आश्वासन दिया है, इससे यहां उत्सव का माहौल बना है, हमारी खुशी की कोई सीमा नहीं है हम सभी मिलकर इस ऐतिहासिक घोषणा का जश्न मना रहे हैं।


जानें क्यों बिना अनुमति मणिपुर में जा भी नहीं सकेंगे भारतीय

मणिपुर में इनर लाइन परमिट लागू कर दिया गया है। इनर लाइन परमिट एक यात्रा दस्तावेज़ है, जिसे भारत सरकार (अपने नागरिकों के लिए जारी करती है, ताकि वो किसी संरक्षित क्षेत्र में निर्धारित अवधि के लिए यात्रा कर सकें। यानि अब अगर भारत के किसी हिस्से से कोई मणिपुर जाता है, तो वहां तब तक नहीं जा सकता जब तक कि उसको इसकी अनुमति नहीं मिल जाए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस आदेश पर आज दस्तखत कर दिये।ramnath kovind

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इनर लाइन परमिट कोई नया शब्द नहीं है। अंग्रेज़ों के शासन काल में सुरक्षा उपायों और स्थानीय जातीय समूहों के संरक्षण के लिए वर्ष 1873 के रेग्यूलेशन में इसका प्रावधान किया गया था।


अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम के बाद मणिपुर चौथा राज्य है जहां इनर लाइन परमिट यानि आईएलपी लागू हो गया है। औपनिवेशिक भारत में, वर्ष 1873 के बंगाल-ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन एक्ट में ब्रितानी हितों को ध्यान में रखकर ये कदम उठाया गया था जिसे आज़ादी के बाद भारत सरकार ने कुछ बदलावों के साथ कायम रखा था।

फिलहाल पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों में इनर लाइन परमिट लागू नहीं होता है। इनमें असम, त्रिपुरा और मेघालय शामिल हैं। हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों में इसकी मांग के समर्थन में आवाज़ें उठती रही हैं।

लंबे समय से हो रही थी इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू करने की मांग

नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन की ये मांग रही है कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू की जाए। पिछले ही साल मणिपुर में इस आशय का एक विधेयक पारित किया गया था जिसमें ‘गैर-मणिपुरी’ और ‘बाहरी’ लोगों पर राज्य में प्रवेश के लिए कड़े नियमों की बात कही गई थी।Amit shah

वर्ष 1971 के मुक्ति-संग्राम के बाद बांग्लादेश से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक भागकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंचे थे। उसके बाद पूर्वोत्तर राज्यों में इनर लाइन परमिट की मांग को बल मिला था।

नागरिकता संशोधन विधेयक लागू नहीं

साथ ही मणिपुर को एक राहत ये भी दी गई है कि वहां नागरिकता संशोधन विधेयक लागू नहीं होगा, क्योंकि वो भारतीय संविधान की छठीं अनुसूची में आने वाले वाला पूर्वोत्तर भारत का राज्य है।Amit shah

इसका मतलब ये हुआ कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई यानी गैर-मुसलमान शरणार्थी भारत की नागरिकता हासिल करके भी असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में किसी तरह की ज़मीन या क़ारोबारी अधिकार हासिल नहीं कर पाएंगे।