जम्मू-कश्मीर में BDC चुनाव का कांग्रेस ने किया बहिष्कार

कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद(जीए) मीर ने कहा कि “कश्मीर में राजनीतिक नेता नजरबंद हैं। चुनाव आयोग को ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल चुनाव ऐलान से पहले राजनीतिक दलों से बात करनी चाहिए थी।”

Written by: October 9, 2019 1:40 pm

नई दिल्ली। धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में जैसे-जैसे हालात सामान्य हो रहे हैं वैसे-वैसे अब वहां चुनाव होने की राह भी आसान हो गई है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में ब्लाक डेवलपमेंट काउंसिल(BDC) के चुनाव होने जा रहे हैं। इससे माना जा रहा है जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र का असली रूप मिलने को मदद मिलेगी।

हालांकि BDC चुनाव की घोषणा होते ही विपक्ष ने इसका बहिष्कार करने की घोषणा की है। पहले नेशनल कांफ्रेंस ने इसका विरोध कर बहिष्कार किया और अब कांग्रेस ने भी इस चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। बता दें कि कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद(जीए) मीर ने कहा कि “कश्मीर में राजनीतिक नेता नजरबंद हैं। चुनाव आयोग को ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल चुनाव ऐलान से पहले राजनीतिक दलों से बात करनी चाहिए थी।”

मीर ने कहा कि, “जब नेता हिरासत में होते हैं तो राजनीतिक दल चुनाव में कैसे हिस्सा ले सकते हैं। अगर सरकार ने सभी नेताओं को रिहा कर दिया होता तो हम चुनाव में हिस्सा लेते, लेकिन हम चुनाव का बहिष्कार करेंगे।”

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बता दें कि जम्मू कश्मीर में पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव 24 अक्टूबर को हो रहे हैं। आज नामांकन पत्र दाखिल करने का अंतिम दिन था। कांग्रेस प्रदेश प्रधान जीए मीर ने राज्य के मौजूदा हालात का हवाला देते हुए कहा कि वे चुनावों में भाग लेना चाहते थे परंतु केंद्र सरकार ने भाजपा को छोड़ अन्य पार्टियों के नेताओं के लिए ऐसे हालात बना दिए हैं कि वे न तो अपने लोगों के बीच जा सकते हैं और न ही पार्टी के हित में प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।

मीर ने कहा कि उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही कि ऐसे हालात में आखिरकार केंद्र को बीडीसी चुनावों की इतनी जल्दबाजी क्यों थी। ये चुनाव भारतीय संविधान के 73वें संशोधन के अनुसार भी नहीं हो रहे हैं। जबकि कांग्रेस हमेशा पंचायतों को मजबूत करने के पक्षधर रही है।

मीर ने कहा कि सरकार ने पार्टी आधार पर चुनाव करवाने का फैसला एकतरफा लिया है। पीडीपी और नेकां ने पहले ही चुनाव बहिष्कार के स्पष्ट संकेत दे दिए थे। कांग्रेस ही एकमात्र प्रमुख विपक्षी पार्टी थी जो भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही थी, लेकिन अब कांग्रेस के चुनाव में भाग न लेने के बाद मुख्य तौर पर भाजपा और पैंथर्स पार्टी ही मैदान में रह गई हैं। हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा करने के बाद प्रचार करना शुरू भी कर दिया है।