महाराष्ट्र: कांग्रेस के नाना पटोले बने विधानसभा स्पीकर

कांग्रेस नेता नाना पटोले निर्विरोध महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष बन गए हैं। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के गठबंधन महाविकास आघाड़ी ने उन्हें संयुक्त रूप से स्पीकर पद का उम्मीदवार बनाया था।

Written by: December 1, 2019 9:25 am

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता नाना पटोले निर्विरोध महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष बन गए हैं। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के गठबंधन महाविकास आघाड़ी ने उन्हें संयुक्त रूप से स्पीकर पद का उम्मीदवार बनाया था।

Nana Patole

प्रोटेम स्पीकर दिलीप वलसे पाटिल ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि नाना पटोले निर्विरोध स्पीकर चुने गए हैं। पाटिल ने कहा कि पटोले से आग्रह किया जाता है कि वे अपना आसन ग्रहण करें। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पटोले को स्पीकर के आसन तक ले गए। उनके साथ अन्य नेता भी थे।

Nana Patole

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्पीकर कैंडिडेट का नाम वापस ले लिया है। भाजपा ने इस पद के लिए किसान कठोरे का नाम प्रस्तावित किया था लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। भाजपा ने कहा कि अन्य पार्टियों के अनुरोध को देखते हुए स्पीकर चुनाव निर्विरोध कराए जाने का फैसला किया गया। इसके लिए सभी दलों की एक बैठक हुई जिसमें यह निर्णय लिया गया।

Devendra Fadnavis

महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा, ‘भाजपा ने कल किसान कठोरे को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के पद के लिए नामित किया था। लेकिन कई बार अनुरोध किए जाने के बाद हमने कथोरे की उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया है।’

कांग्रेस की तरफ से महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के उम्मीदवार नाना पटोले महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुन लिए गए हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव पर एनसीपी के छगन भुजबल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए विपक्ष ने भी नामांकन भरा था, लेकिन अन्य विधायकों के अनुरोध और विधानसभा की गरिमा को बनाए रखने के लिए उन्होंने नाम वापस ले लिया। अब अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध चुना गया है।

इससे पहले शनिवार को महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव ठाकरे ने अपनी पहली अग्निपरीक्षा पास की। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने शनिवार को यहां 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया।

Maharashtra Chief Minister Uddhav Thackeray

शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के महागठबंधन को विश्वास मत के लिए न्यूनतम 145 वोट की जरूरत थी, लेकिन उन्हें कुल 169 मत मिले। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 105 विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट किया, जबकि चार विधायक तटस्थ रहे और उन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।