मोहम्मद के सबूतों पर कोर्ट ने सुनाया फैसला, ‘नीचे था मंदिर’

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का पुरातत्वविद और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अधिकारी केके मोहम्मद ने भी स्वागत किया है।

Written by: November 10, 2019 11:11 am

नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ये साफ कर दिया कि, विवादित जमीन पर रामलला का हक है। इसके साथ ही मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को कहीं और जमीन मुहैया कराई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने केके मोहम्मद के दिए सबूतों पर अपना फैसला सुनाया है और माना कि नीचे मंदिर था।

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अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का पुरातत्वविद और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अधिकारी केके मोहम्मद ने भी स्वागत किया है। पद्मश्री से सम्मानित केके मोहम्मद ने कहा कि एएसआई के दिए सबूतों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना कि विवादित स्थल पर पहले एक मंदिर था और हमें अब एक नया मंदिर बनाना चाहिए।

KK Mohammad

उन्होंने कहा, ‘मैंने जब कहा था कि बाबरी मस्जिद से पहले विवादित स्थल पर राम मंदिर था तो मुझे बहुत परेशान किया गया। कई संगठनों ने मुझे धमकियां दीं। यह बिल्कुल वैसा फैसला है, जैसा हम सब चाहते थे।’ उन्होंने कहा, ‘यह जगह हिंदुओं के लिए ठीक उतनी महत्वपूर्ण है, जैसे मुसलमानों के लिए मक्का-मदीना। यह जगह मोहम्मद साहब से जुड़ी हुई नहीं है।’

बता दें कि पिछले महीने अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान मोहम्मद ने कहा था कि मुस्लिमों को अपनी इच्छा से अयोध्या की विवादित भूमि सौंप देनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि विवादित बाबरी मस्जिद के नीचे मिले सबूतों से पता चलता है कि वहां एक बड़ा मंदिर था।

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‘मस्जिद के 12 स्तंभ थे मंदिरों के अवशेष’

KK mohammad archeologist

मोहम्मद ने बताया, ‘1976-77 में उत्खनन के दौरान पूरा इलाका पुलिस के कब्जे में था और आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं थी। हमने देखा कि मस्जिद के 12 स्तंभ ऐसे थे जो कि मंदिर के अवशेष थे।’ ये पिलर मंदिर के ही थे इस मामले में तर्क देते हुए मोहम्मद ने कहा, ’12वीं और 13वीं शताब्दी के अधिकतर मंदिरों के स्तंभों में आधार पूर्ण कलश के जैसा होता था जो कि हिंदू धर्म में समृद्धि का प्रतीक है। इसे अष्ट मंगल चिह्न के रूप में जाना जाता है जो कि आठ पवित्र चिह्नों में से एक है।’