देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार को लेकर खोला बड़ा राज

फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार ने हमसे संपर्क किया और कहा कि राकांपा(एनसीपी) कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहती। तीन पार्टियों की सरकार को नहीं चलाया जा सकता।

Avatar Written by: December 8, 2019 10:02 am

नई दिल्ली। 23 नवंबर को एनसीपी नेता अजित पवार के साथ शपथ लेने को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि, अजित पवार ने उन्हें राकांपा(एनसीपी)के सभी 54 विधायकों के समर्थन का भरोसा दिया था।

CM Devendra Fadnavis

बता दें कि शपथ लेने के तीन दिन बाद ही दोनों नेताओं को बहुमत साबित ना कर पाने का कारण अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। गौरलतब है कि देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। फडणवीस ने कहा कि अजीत पवार ने उन्हें राकांपा(एनसीपी)के सभी 54 विधायकों के समर्थन का भरोसा दिया था। उन्होंना बताया कि एनसीपी नेता अजीत पवार उनके पास सरकार बनाने का प्रस्ताव लेकर आए थे।

devendra fadnavis oath

अजीत पवार ने मेरी कुछ विधायकों से बात कराई

लंबे समय से दबे इस गहरे राज़ को खोलते हुए फडणवीस ने बताया कि अजीत पवार ने मेरी कुछ विधायकों से बात कराई थी, जिन्होंने कहा था कि वे भाजपा के साथ जाना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने खुद कहा था कि उनकी शरद पवार से भी इस संबंध में बात हुई है।

अजीत पवार ने हमसे संपर्क किया

फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार ने हमसे संपर्क किया और कहा कि राकांपा(एनसीपी) कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहती। तीन पार्टियों की सरकार को नहीं चलाया जा सकता। हम स्थिर सरकार के लिए भाजपा के साथ जाने को तैयार हैं। भाजपा नेता ने स्वीकार किया कि उनका यह कदम उलटा पड़ गया, हालांकि उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम और पर्दे के पीछे की कहानी अगले कुछ दिनों में सामने आएगी।

ajit pawar fadanvis

अशोक चव्हाण ने कहा, हमारी भी सुनों

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने शनिवार को कहा कि प्रदेश की गठबंधन सरकार को फैसले लेने के दौरान उनकी पार्टी की भी बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में जिन तीन पार्टियों ने मिलकर गठबंधन सरकार बनाई है, उनमें संतुलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तीनों पार्टियां न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत साथ आई हैं और देश के संविधान से बंधी हुई हैं। इस पर कोई समझौता नहीं होगा।