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Rampur Bypoll Results: आजम के गढ़ में पहली बार किसी हिंदू प्रत्याशी ने अपने प्रतिद्वंदी को दी मात, हार से बौखलाए आसीम राजा ने कह दी ऐसी बात

Rampur Bypoll Results: पहली बार रामपुर से कोई हिंदू विधायक बना है, अन्यथा पिछले सात दशकों से लेकर अब तक प्रदेश में यहां मुस्लिम विधायक ही रहा है। वहीं दो दशकों से ज्यादा तक रामपुर में आजम गढ़ ही दबदबा रहा, लेकिन उस वक्त पासा पलट गया, जब साल 2019 में आजम ने चुनाव प्रचार के दौरान सीएम योगी और पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी कर दी थी।

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नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के साथ आज उत्तर प्रदेश की मैनपुरी और रामपुर सीट पर विगत पांच दिसंबर को हुए उपचुनाव के नतीजों का भी ऐलान हुआ। मैनपुरी सीट पर बीजेपी ने जहां रघुराज सिंह शाक्य को चुनावी मैदान में उतारा था, तो वहीं सपा ने डिंपल यादव को। बता दें, गत दिनों सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उक्त सीट रिक्त हुई थी, जिसके बाद इस पर गत दिनों उपचुनाव कराए गए। ध्यान रहे, मोदी-योगी पर विगत लोकसभा चुनाव में अभद्र टिप्पणी की वजह से विधानसभा सदस्यता जाने के बाद रिक्त हुई रामपुर सीट पर भी उपचुनाव कराए गए। इस सीट पर बीजेपी ने जहां आकाश सक्सेना और सपा ने आसीम राजा, जो कि आजम खान के करीबी माने जाते हैं, को चुनावी मैदान में उतारा था। आसीम राजा भी सपा की तरफ से चुनाव लड़े थे। वहीं, इन दोनों ही सीटों के चुनावी नतीजों की घोषणा ही हिमाचल और गुजरात के साथ ही कर दी गई।

 

कैसे रहे नतीजे

वहीं दोनों ही सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों की बात करें, तो मैनपुरी सीट से सपा की डिंपल यादव ने बीजेपी के रघुराज सिंह शाक्य को करारी शिकस्त देकर मुलयाम के गढ़ को बचा लिया, तो वहीं रामपुर सीट पर बीजेपी के आकाश सक्सेना ने आसीमा राजा को करारी शिकस्त दी। जरा ध्यान दीजिएगा। जब मैनपुरी और रामपुर में उपुचनाव हुए थे, तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस पर मतदाताओं को वोट ना देने का आरोप लगाया था और यह भी कहा था कि यह सबकुछ बीजेपी के कहने पर किया जा रहा है। उन्होंने बूथ कैप्चरिंग का भी आरोप लगाया था। अब जब मैनपुरी सीट पर डिंपल यादव जीत दर्ज कर चुकी है, तो सपा प्रमुख की क्या प्रतिक्रिया रहती है। यह देखने वाली बात है। हालांकि, मैनपुरी सीट पर चुनाव जीतने के बाद अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता कर मतदाताओं-कार्यकर्ताओं का आभार जताया है। अब ऐसी सूरत में उनसे उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर भी सवाल पूछा जाना चाहिए।

वहीं, इन सबके बीच रामपुर में कुछ अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। रामपुर में सपा प्रत्याशी आसीम राजा को बीजेपी प्रत्याशी आकाश सक्सेना से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है, तो वो अब मीडिया से कह रहे हैं कि यहां चुनाव हुआ ही नहीं है, बल्कि यहां तो मतदाताओं को वोट देने से भी रोक गया था। प्रदेश के सभी बूथों को कैप्चोर कर लिए गए थे। उन्होंने कहा कि शहर के 200 बूथों पर पुलिस ने लोगों को वोट डालने ही नहीं दिया। 252 बूथों पर 250 से भी कम मत पड़े हैं। उन्होंने अपनी हार ठीकरा पुलिस को बताया।

पहली बार कोई हिंदू बना विधायक

ध्यान रहे, पहली बार रामपुर से कोई हिंदू विधायक बना है, अन्यथा पिछले सात दशकों से लेकर अब तक प्रदेश में यहां मुस्लिम विधायक ही रहा है। वहीं दो दशकों से ज्यादा तक रामपुर में आजम का ही दबदबा रहा, लेकिन उस वक्त पासा पलट गया, जब साल 2019 में आजम ने चुनाव प्रचार के दौरान सीएम योगी और पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी कर दी थी। जिसके बाद बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की और आजम के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत तीन साल की सजा सुनाई।

बता दें, किसी भी जनप्रतिनिधित्व को तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता स्वत: निरस्त हो जाती है। जिसके बाद आजम की सदस्यता चली गई। इसके बाद उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई। हालांकि, तीन साल की सनाई गई सजा के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। वहीं, रामपुर में उपचुनाव के दौरान उन्होंने आसीम राजा के समर्थन में जमकर प्रचार किया है। जनसभाओं में भावुक अपील भी की, लेकिन अफसोस जनता को उन पर तरस ना आया।

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