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PM Narendra Modi’s Blog On Mahakumbh : पीएम नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ श्रद्धालुओं से किस बात के लिए मांगी माफी?

PM Narendra Modi's Blog On Mahakumbh : महाकुंभ का 45 दिनों के बाद अब समापन हो गया है। महाकुंभ के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ब्लॉग लिखा जिसमें उन्होंने कहा, महाकुंभ में दिखी एकता, युग परिवर्तन की वो आहट है, जो देश का नया भविष्य लिखने जा रही है।

नई दिल्ली। महाकुंभ का 45 दिनों के बाद अब समापन हो गया है। महाकुंभ के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ब्लॉग लिखा जिसमें उन्होंने कहा, महाकुंभ में जिस भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागीदारी की है वो सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और विरासत को सुदृढ़ और समृद्ध रखने के लिए कई सदियों की एक सशक्त नींव भी रख गया है। महाकुंभ में दिखी एकता, युग परिवर्तन की वो आहट है, जो देश का नया भविष्य लिखने जा रही है। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ श्रद्धालुओं से माफी भी मांगी है।

मोदी ने लिखा, इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती से प्रार्थना करता हूं कि हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा। जनता जनार्दन, जो मेरे लिए ईश्वर का ही स्वरूप है, श्रद्धालुओं की सेवा में भी अगर हमसे कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं। मोदी ने कहा, जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा। समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र के लोग इस महाकुंभ में एक हो गए। ये एक भारत श्रेष्ठ भारत का चिर स्मरणीय दृश्य करोड़ों देशवासियों में आत्मविश्वास के साक्षात्कार का महापर्व बन गया।

पीएम ने लिखा, प्रयागराज का महाकुंभ आज दुनियाभर के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के साथ ही प्लानिंग और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए भी रिसर्च का विषय बन गया है। एकता के महाकुंभ को सफल बनाने के लिए देशवासियों के परिश्रम, उनके प्रयास, उनके संकल्प से अभीभूत मैं द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ के दर्शन करने जाऊंगा। मैं श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प को समर्पित करते हुए हर भारतीय के लिए प्रार्थना करूंगा। मैं कामना करूंगा कि देशवासियों में एकता की ये अविरल धारा, ऐसे ही बहती रहे।

 

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