अलविदा 2019: नरेंद्र मोदी सरकार के साथ जुड़े ये तीन बड़े फैसले, तीन बड़े विवाद इस साल

साल 2019 को अलविदा कहने से पहले नरेंद्र मोदी सरकार के उन तीन बड़े फैसले और तीन बड़े विवाद को जानना जरूरी है।

Written by: December 30, 2019 1:57 pm

साल 2020 दस्तक देने की तैयारी के साथ साल 2019 को अलविदा कहने का वक्त आ गया है। इसी साल मई में नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 का गठन हुआ और सरकार को देश की जनता ने बड़े बहुमत के साथ संसद में भेजा। साल 2019 को अलविदा कहने से पहले नरेंद्र मोदी सरकार के उन तीन बड़े फैसले और तीन बड़े विवाद को जानना जरूरी है।

pm modi amit shah jp nadda

आपको याद होगा कि साल के शुरुआत में ही पुलवामा में आतंकी हमले हुए थे जिसमें हमने 40 बहादुर जवानों को खो दिया। इसके बाद जाबांज भारतीय वायुसेना के जवानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर एयरस्ट्राइक किया जिसमें आतंकियों के कई कैंप तबाह हो गए।

2019 में 500 साल से ज्यादा समय चले आ रहे अयोध्या मामले का हल निकला

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नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सैकड़ों साल पुराने अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने अन्य पक्षों की दलीलों को खारिज करते हुए भूमि रामलला विराजमान को सौंप दिया। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार तीन महीने में एक ट्रस्ट का निर्माण करे। वहीं मस्जिद के लिए अयोध्या में पांच एकड़ भूमि मुस्लिम पक्ष को दे।

अनुच्छेद 370 का जम्मू-कश्मीर से खात्मा

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पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया। इसके साथ ही अनुच्छेद 35ए का खात्मा भी हो गया। जम्मू कश्मीर में अब भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही केंद्र ने जम्मू और कश्मीर को विभाजित करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम से दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का निर्माण किया।

तीन तलाक जैसी कुप्रथा का हुआ खात्मा

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एक अगस्त 2019 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करते ही तीन तलाक बिल ने कानून का रूप ले लिया। अब भारत में तीन तलाक गैरकानूनी हो गया है। तीन तलाक के दोषी को तीन साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा पीड़ित महिला गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। इस विधेयक को लोकसभा ने 25 जुलाई और राज्यसभा ने 30 जुलाई को पारित कर दिया था।

नागरिकता संशोधन कानून हो गया पास, लेकिन विवाद जारी

12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक ने कानून की शक्ल ले ली। इस कानून के अनुसार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी लोगों को आसानी से भारत की नागरिकता मिल सकेगी। इस कानून में मुस्लिमों का नाम नहीं होने से देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। जिसे कई बड़ी पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त है। इन प्रदर्शनों में अबतक 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

सीबीआई और ममता बनर्जी को लेकर केंद्र सरकार से विवाद

Mamta Banerjee

तीन फरवरी 2019 को जब सीबीआई की बड़ी टीम चिटफंड घोटाले की जांच के लिए कोलाकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के पास पहुंची तब उनमें से कुछ अधिकारियों को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद केंद्र ने सीआरपीएफ को सीबीआई अधिकारियों की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया। जिसके बाद ममता बनर्जी खुद धरने पर बैठ गईं और केंद्र सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई। इसके बाद पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों ने अपने यहां सीबीआई के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।

कर्नाटक और महाराष्ट्र का सियासी संकट बना विवाद की वजह

25, 28 और 29 जुलाई 2019 को कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष रमेश कुमार ने कांग्रेस-जेडीएस के 17 बागी विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था। गौरतलब है कि कांग्रेस-जेडीएस के 17 विधायकों ने अपनी पार्टी से विद्रोह करते हुए इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद कुमारस्वामी सरकार बहुमत साबित करने में असफल रही थी।

karnataka

महाराष्ट्र में इस साल अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव हुए। चुनाव में शिवसेना और भाजपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन को जनता ने पूर्ण बहुमत भी दिया, लेकिन शिवसेना सीएम पद को लेकर अड़ गई, जिसके बाद दोनों दलों का गठबंधन टूट गया। केंद्र सरकार में शिवसेना के मंत्री ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने के लिए बातचीत शुरू कर दी।

Devendra Fadanvees Ajit Pawar

हालांकि इस दौरान 23 नवंबर की सुबह पूरा देश उस समय आश्चर्यचकित रह गया, जब सुबह सवेरे देवेंद्र फडणवीस ने एकबार फिर महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ ले ली, उनके साथ अजीत पवार ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। हालांकि शरद पवार ने अपनी पावर दिखाते हुए अजीत पवार को साधा, जिसके बाद देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ा। देवेंद्र फडणवीस के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ ली, उनकी सरकार में कांग्रेस और एनसीपी भी शामिल हुए।