राज्यपाल ने बंगाल की लड़कियों को बताया डांसर

मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय के एक बयान से पश्चिम बंगाल में बड़ा बवाल मच गया है। चूंकि बयान ही इतना विवादित है कि बवाल मचना तो तय है। बता दें कि तथागत रॉय ने कहा है कि बंगाल कभी महान हुआ करता था लेकिन अब उसकी महानता चली गई है। उन्‍होंने कहा कि अब बंगाली लोग फर्श साफ कर रहे हैं और बंगाली लड़कियां बार में डांस करती हैं।

Avatar Written by: June 6, 2019 6:44 pm

नई दिल्ली। मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय के एक बयान से पश्चिम बंगाल में बड़ा बवाल मच गया है। चूंकि बयान ही इतना विवादित है कि बवाल मचना तो तय है। बता दें कि तथागत रॉय ने कहा है कि बंगाल कभी महान हुआ करता था लेकिन अब उसकी महानता चली गई है। उन्‍होंने कहा कि अब बंगाली लोग फर्श साफ कर रहे हैं और बंगाली लड़कियां बार में डांस करती हैं।

बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय करने के अलावा ड्राफ्ट में त्रिभाषा फॉर्म्युले की सिफारिश अहम थी। इसमें यह सिफारिश की गई थी कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों में भी अंग्रेजी, स्थानीय भाषा के अलावा हिंदी की शिक्षा भी अनिवार्य की जाए। इस पर तमिलनाडु की पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके ने तीखा विरोध किया। इसके बाद सरकार ने ड्राफ्ट में बदलाव करते हुए कहा है कि हमारी नीति हिंदी को थोपने की नहीं है।

हालांकि ये भी बता दें कि तथागत रॉय पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं और लंबे समय तक बीजेपी में रहे हैं। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से इस संबंध में एक के बाद एक कई ट्वीट किए। उन्होंने बंगालियों द्वारा हिंदी सीखने के विरोध को ज्ञान की कमी और राजनीतिक बताया।

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तृणमूल कांग्रेस ने राज्‍यपाल के इस बयान पर विरोध प्रदर्शन किया है। सांसद काकोली घोष दस्‍तीदार ने हजरा इलाके में धरने का नेतृत्‍व किया।

तथागत रॉय ने ट्वीट किया कि कोई बहुत बड़ा विरोध नहीं है, उनके शोर मचाने के पीछे सिर्फ राजनीतिक कारण है। उन्होंने कहा, ‘असम, महाराष्ट्र और ओडिशा राज्य भी गैर-हिंदी भाषी राज्य हैं, लेकिन वे लोग हिंदी का विरोध नहीं कर रहे? दूसरे तर्क में कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विद्यासागर, विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और नेताजी (सुभाष चंद्र बोस) की भूमि है, बंगालियों को हिंदी क्यों सीखनी चाहिए?’