अमेरिका-ईरान तनाव: ईरान के रास्ते नहीं जाएंगी भारतीय एयरलाइंस, बढ़ेगी दूरी

अमेरिका-ईरान के बीच एकदम जंग जैसे हालात बन रहे हैं। जिसका असर भारत पर भी पड़ता दिख रहा है। भारतीय एयरलाइंस ने डीजीसीए के साथ परामर्श के बाद ईरान के एयरस्पेस में ना जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्होंने पैसेंजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया है। ऑपरेटर्स का कहना है कि वे फ्लाइट के वैकल्पिक रूट पर विचार करेंगे।

Written by Newsroom Staff June 22, 2019 5:42 pm

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच एकदम जंग जैसे हालात बन रहे हैं। जिसका असर भारत पर भी पड़ता दिख रहा है। भारतीय एयरलाइंस ने डीजीसीए के साथ परामर्श के बाद ईरान के एयरस्पेस में ना जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्होंने पैसेंजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया है। ऑपरेटर्स का कहना है कि वे फ्लाइट के वैकल्पिक रूट पर विचार करेंगे।

पश्चिमी देशों का रास्ता और भी लंबा
इस फैसले के बाद दक्षिण एशिया और पश्चिमी देशों के बीच दूरी और बढ़ जाएगी। इसका असर नई दिल्ली पर भी होगा। बता दें कि पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना की कार्रवाई के बाद से अब तक पाकिस्तान एयर स्पेस पूरी तरह बंद है। ऐसे में दक्षिण एशिया से पश्चिमी देशों का रास्ता और लंबा हो जाएगा।

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया की क्वांटस, ब्रिटिश एयरवेज, नीदरलैंड्स की केएलएम और जर्मनी की लुफ्तांसा भी उस क्षेत्र में उड़ान से पहरेज करेंगी। वैश्विक एयरलाइंस को दिशानिर्देश मुहैया कराने वाली कंपनी OPS ग्रुप ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘किसी नागरिक विमान को दक्षिणी ईरान में मार गिराने का खतरा वास्तविक है।’

ऑस्ट्रेलिया की एयरलाइंस क्वांटस ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी से बचने के लिए वह अपनी लंदन उड़ानों के मार्ग परिवर्तित करेगी। नीदरलैंड एयरलाइन केएलएम और ब्रिटिश एयरवेज ने भी कहा कि उनकी उड़ानें जलडमरूमध्य से परहेज करेंगी।

लुफ्तांसा ने कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के साथ ही आसपास के क्षेत्र से परहेज करेगी। हालांकि, उसने कहा कि वह तेहरान के लिए अपनी उड़ानें जारी रखेगी।

Donald Trump And hasan ruhani

क्या है पूरा मामला
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद गुरुवार को ईरान की ओर से दागी गई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से अमेरिकी नौसेना के मानवरहित विमान RQ-4A ग्लोबल हॉक को मार गिराने के बाद द फेडरल एविएशन ऐडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने क्षेत्र में ‘गलत पहचान या गलत अनुमान की संभावना’ की चेतावनी दी।

अमेरिका के उक्त ड्रोन विमान के पंख बोइंग 737 जेट से बड़े थे और इसकी कीमत 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक थी।