सबरीमाला पर ऐसे फंस गई केरल की वामपंथी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में जवाब देते न बना!

केरल की वामपंथी सरकार सबरीमाला के मामले में फंस गई है। लोकसभा चुनाव के पहले तक सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन कर रही सीपीएम सरकार का लोकसभा के नतीजे आते ही तेवर बदल गया है।

Avatar Written by: November 20, 2019 1:56 pm

नई दिल्ली। केरल की वामपंथी सरकार सबरीमाला के मामले में फंस गई है। लोकसभा चुनाव के पहले तक सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन कर रही सीपीएम सरकार का लोकसभा के नतीजे आते ही तेवर बदल गया है। चुनाव में हुई बुरी हार ने उसे सबरीमाला की परंपराओं की याद दिला दी है। अब वह इस मामले में स्टैंड लेने से बच रही है।

sabrimala

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी यही तस्वीर दिखाई दी। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार से कहा है कि वो चार हफ्ते में  सबरीमाला अयप्पा मन्दिर के प्रशासन  और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए अलग से क़ानून पेश करे। मगर केरल सरकार अलग कानून लाने से घबरा रही है। उसे लगता है कि ऐसा करने से एक बार फिर से सबरीमाला के भक्त भड़क सकते हैं और आने वाले चुनाव में उसे नुकसान हो सकता है।

keral government

कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में केरल  सरकार को सबरीमला मन्दिर के नया क़ानून लाने के लिए कहा था। लेकिन राज्य सरकार ने त्रावनकोर- कोचीन रिलीजियस  इंस्टिट्यूशन एक्ट का ड्राफ्ट पेश किया। दरअसल सरकार सबरीमला और बाकी मंदिरों के लिए संयुक्त रूप से क़ानून लाना चाह रही थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर  एतराज किया।  कोर्ट ने कहा- सबरीमाला मन्दिर के लिए अलग से क़ानून होना चाहिए।

keral cm

उधर केरल सरकार बीच का रास्ता निकालने में जुटी हुई है।  उसने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ 10 से 50 साल कि महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दे तो राज्य सरकार मंदिर की परामर्श समिति में महिलाओं को रखेगी। मगर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह काफी नहीं है।