भारत की बड़ी जीत, ICJ ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगाई

बता दें कि ईरान के चाबहार में बिजनेस करने वाले भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को भारत का जासूस बताकर पाकिस्तान ने गहरी साजिश चली थी। भारत ने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब देते हुए साफ कहा था कि उसे अगवा किया गया था, इसीलिए जब पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने उसके लिए सजा-ए-मौत मुकर्रर की तो भारत हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत में गया।

Written by Newsroom Staff July 17, 2019 6:55 pm

नई दिल्ली। नीदरलैंड के हेग में स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत में पाकिस्तान में बंद भारत के कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई हुई। जहां भारत को बड़ी जीत मिली है। अदालत ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है। साथ ही उनको काउंसलर एक्सेस की सुविधा भी मिलेगी।

बता दें कि ईरान के चाबहार में बिजनेस करने वाले भारतीय नौसेना के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को भारत का जासूस बताकर पाकिस्तान ने गहरी साजिश चली थी। आईसीजे की कानूनी सलाहकार रीमा ओमेर ने ट्वीट किया है कि जाधव को काउंसलर एक्सेस मिलेगा। कोर्ट ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कहा है

भारत ने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब देते हुए साफ कहा था कि उसे अगवा किया गया था, इसीलिए जब पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने उसके लिए सजा-ए-मौत मुकर्रर की तो भारत हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत में गया।

ये भी बता दें कि कुलभूषण जाधव पर 15-1 से भारत के पक्ष में फैसला आया है। 16 में से 15 जजों ने भारत के हक में फैसला सुनाया है। आईसीजे ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है।

आईसीजे के फैसले की मुख्य बातें–

आईसीजे ने अपने फैसले में भारत को कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने को कहा।

आईसीजे का कहना है कि कुलभूषण जाधव की सजा पर पुनर्विचार के लिए उसकी फांसी पर रोक जारी रहेगी।

आईसीजे ने कुलभूषण जाधव को भारतीय नागरिक माना। कोर्ट ने कहा कि कई मौकों पर पाकिस्तान की तरफ से जाधव को भारतीय नागरिक कहकर संबोधित किया गया।

आईसीजे ने कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना।

भारत ने पाकिस्तान को कानून अपने हाथ में लेने से रोकने में सफलता पाई और मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में ले गया। इस वजह से पाकिस्तान अब तक जाधव को फांसी नहीं दे सका है।

पाकिस्तान ने जाधव मामले में वियना संधि का उल्लंघन करते हुए उन्हें न सिर्फ कानूनी मदद से दूर रखा, बल्कि मां और पत्नी तक से सीधे मिलने नहीं दिया।

दो साल और दो महीने तक आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ में इस मामले की सुनवाई चली है।