हरियाणा: एक तरफ कांग्रेस खुद में उलझी है, दूसरी तरफ CM मनोहर लाल निकले ‘मिशन-75’ पर

इस बार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से हरियाणा में मिशन-75 का टारगेट दिया गया है। इसके लिए सीएम ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा का मजबूत संगठन भी मुख्यमंत्री की ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ को सफल बनाने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है।

Written by: August 19, 2019 8:32 pm

नई दिल्ली। हरियाणा में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर भाजपा की तरफ से व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी चुनावी मोड में आ गई है वहीं विपक्षी दल खुद में उलझे हुए हैं। बता दें कि हरियाणा कांग्रेस में मतभेद की खबरें आने से पार्टी आलाकमान डैमेज कंट्रोल करने में लगा हुआ है।

बता दें कि प्रदेश में दोबारा सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने के लिए सीएम मनोहर लाल ने कमान संभाल ली है। दरअसल 15 अगस्त से पहले सीएम रूस की यात्रा पर गए थे, जहां से आने के बाद उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया और उसके बाद रविवार को चुनावी रथ पर सवार हो गए।

इस बार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से हरियाणा में मिशन-75 का टारगेट दिया गया है। इसके लिए सीएम ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा का मजबूत संगठन भी मुख्यमंत्री की ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ को सफल बनाने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है। विधायक अपनी टिकट बचाने के लिए हल्कों में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।

सभी भाजपा विधायक पांच चरणों में होने वाली सीएम की रथ यात्रा को लेकर फील्ड में डट गए हैं। मुख्यमंत्री यात्रा के दौरान हर क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों का विस्तार से उल्लेख कर रहे हैं, साथ ही विपक्षी दल भी उनके निशाने पर हैं। भ्रष्टाचार को लेकर वह पूर्व सरकारों पर तीखे वार करने से नहीं चूक रहे। भाजपा को प्रदेश में कमजोर विपक्ष के कारण भी वाकओवर मिल रहा है।

वहीं विपक्ष की बात करें तो इनेलो के दस विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसके उलट इनेलो, विधानसभा चुनाव तैयारियां अभी तक शुरू ही नहीं कर पाई है। कांग्रेस भी अंतर्कलह से जूझ रही है। प्रदेश में कांग्रेस छह गुटों में बंटी हुई है। अधिकांश बड़े नेता मुख्यमंत्री बनने का सपना पाले हुए हैं। स्थिति यह है कि कांग्रेस आलाकमान भी कोई निर्णय नहीं कर पा रहा। इससे कांग्रेस चुनाव की तैयारी शुरू ही नहीं कर पाई है।

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टुकड़ों में बंटी कांग्रेस के कार्यकर्ता भी असमंजस में है कि किस नेता के साथ जाए। अगर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने जल्दी कोई फैसला नहीं लिया तो पार्टी को विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को मिलता दिखाई दे रहा है।