टूट गया सपा-बसपा गठबंधन, मायावती बोलीं- ‘अखिलेश ने सुधार किए तो फिर साथ होंगे’

मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि, चुनाव नतीजों से साफ है कि बेस वोट भी सपा के साथ खड़ा नहीं रह सका है। सपा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं।

Written by: June 4, 2019 11:48 am

लखनऊ। मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए बसपा सुप्रीमो ने ऐलान किया कि सपा और बसपा का गठबंधन अस्थाई रूप से टूट चुका है लेकिन आगे अगर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी में बदलाव किए तो हम फिर से एकसाथ चुनाव लड़ सकते हैं।

बेस वोट भी सपा के साथ नहीं

मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि, चुनाव नतीजों से साफ है कि बेस वोट भी सपा के साथ खड़ा नहीं रह सका है। सपा की यादव बाहुल्य सीटों पर भी सपा उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। कन्नौज में डिंपल यादव और फिरोजाबाद में अक्षय यादव का हार जाना हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है। उन्होंने कहा कि बसपा और सपा का बेस वोट जुड़ने के बाद इन उम्मीदवारों को हारना नहीं चाहिए था।

Akhilesh yadav

हमें अकेले ही चुनाव लड़ना होगा

मायावती के बेस वोट पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि, सपा का बेस वोट ही छिटक गया है तो उन्होंने बसपा को वोट कैसे दिया होगा, यह बात सोचने पर मजबूर करती है। हमने पार्टी की समीक्षा बैठक में पाया कि बसपा काडर आधारित पार्टी है और खास मकसद से सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा गया था लेकिन हमें सफलता नहीं मिल पाई है। सपा के काडर को भी बसपा की तरह किसी भी वक्त के लिए तैयार रहने की जरूरत है। इस बार के चुनाव में सपा ने यह मौका गंवा दिया है।

मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों को करने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिशनरी बनाते हैं तो फिर हम आगे साथ लड़ेगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाते तो हमें अकेले ही चुनाव लड़ना होगा।

सपा के साथ रिश्तों पर बोलीं मायावती

मायावती ने सपा के साथ रिश्तों पर कहा कि यूपी में गठबंधन के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल उनका खूब सम्मान करते हैं। वह दोनों मुझे अपना बड़ा और आदर्श मानकर इज्जत देते हैं और मेरी ओर से भी उन्हें परिवार के तरह ही सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते केवल स्वार्थ के लिए नहीं बने हैं और हमेशा बने भी रहेंगे। मायावती ने कहा कि निजी रिश्तों से अलग राजनीतिक मजबूरियों को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि यूपी में 11 सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव होंगे। जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं उन सीटों से जीते विधायकों ने लोकसभा लड़ा था जिसकी वजह से वो सीटें खाली हुई हैं। जिसमें बीजेपी के नौ विधायकों ने लोकसभा चुनाव जीता है, जबकि बसपा और सपा के एक-एक विधायक लोकसभा के लिए चुने गए हैं।

 

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