एनआरसी पर “डर” खत्म करने के लिए अमित शाह पहुंचे मिजोरम, नॉर्थ ईस्ट को एक करने की कवायद

अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं कि एनआरसी से किसी भी हिंदू, सिख और ईसाई को बाहर नहीं किया जाएगा, सिर्फ घुसपैठिए बाहर किए जाएंगे। सरकार जल्दी ही संसद में इसके लिए बिल भी लाने जा रही है।

Avatar Written by: October 5, 2019 2:23 pm

नई दिल्ली। एनआरसी के मुद्दे पर देश के कई हिस्सों में विवाद की स्थिति है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एनआरसी लागू न करने का साफ ऐलान कर दिया है। इसी तरह नॉर्थ ईस्ट के भी कुछ राज्य इसे लेकर बेहद सशंकित हैं। इन्हीं डर और अफवाहों को दूर करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मिजोरम पहुंच हुए हैं।

दरअसल नॉर्थ ईस्ट में अनुच्छेद 371 (ए से जी) के तहत कई तरह की विशेष छूट मिली हुई है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद से ही नॉर्थ ईस्ट में कई तरह की अफवाहें तैर रही हैं। इनमें से एक अनुच्छेद 371 के प्रावधानों को खत्म करने की है और दूसरी एनआरसी को लेकर है। एनआरसी को लेकर नॉर्थ ईस्ट के एक हिस्से में स्थानीय बनाम बांग्लादेश का विवाद गहराता जा रहा है।

असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा सरीखे नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में एक तबका ऐसा भी है जो बांग्लादेशी मुसलमानों के साथ ही उन हिंदुओं को भी एनआरसी के तहत बाहर करना चाहता है जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं और जो एनआरसी से बाहर कर दिए गए हैं। मगर बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं है।

अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं कि एनआरसी से किसी भी हिंदू, सिख और ईसाई को बाहर नहीं किया जाएगा, सिर्फ घुसपैठिए बाहर किए जाएंगे। सरकार जल्दी ही संसद में इसके लिए बिल भी लाने जा रही है। मगर इससे पहले गृह मंत्रालय की कोशिश नॉर्थ ईस्ट को इस मुद्दे पर एकजुट करने और अफवाहों को फैलने से रोकने की है।