राजस्थान: अलवर कोर्ट ने पहलू खान केस में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए किया बरी

यह मामला राजस्थान से लेकर दिल्ली तक उठा था। इस मामले में वसुंधरा सरकार को देशभर में आलोचना झेलनी पड़ी थी। पिछले दिनों सरकरा ने विधानसभा में मॉब लिंचिंग कानून पारित कराया है।

Written by Newsroom Staff August 14, 2019 6:22 pm

नई दिल्ली। 2017 में राजस्थान के अलवर में हुए चर्चित मॉब लिंचिंग(पहलू खान) मामले में आज (14 अगस्त) अलवर की एडीजे कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मॉब लिंचिंग में पहलू खान की मौत हो गयी थी। 2017 के इस मामले में भीड़ ने गो-तस्करी के शक में पहलू खान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। लेकिन अब अलवर कोर्ट ने सभी 6 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।

जिन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया था उनका चेहरा वीडियो में नहीं दिखा और पहलू खान के बेटों की गवाही को भी तवज्जो नहीं मिली है। इस मामले में कुल 9 आरोपी हैं, जिनमें से 3 नाबालिग हैं, उनका केस जुवेनाइल कोर्ट में चल रहा है।

बता दें कि इसके अलावा वीडियो बनाने वाला शख्स भी अपने बयान से मुकर गया। यह फैसला आने के बाद पहलू खान के परिवार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। आरोपियों को संदेह का लाभ मिला है और फिलहाल फैसले की कॉपी हमें नहीं मिली है।

गौरतलब है कि इस मामले में सीबीसीआईडी ने नामजद 6 व्यक्तियों को (सुधीर यादव, हुकमचंद यादव, ओम यादव, नवीन शर्मा, राहुल सैनी और जगमाल सिंह) आरोपी नहीं माना था। उनकी जगह वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर 9 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें 3 नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस ने विपिन, रवींद्र, कालूराम, दयानंद, योगेश कुमार, दीपक गोलियां और भीमराठी ओर दो नाबालिग को आरोपी बनाया था। फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

यह मामला 1 अप्रैल, 2017 का है, हरियाणा के नूह मेवात जिले के जयसिंहपूरा गांव निवासी पहलू खान अपने दो बेटों उमर और ताहिर के साथ जयपुर के पशु हटवाड़ा से दुधारू पशु खरीदकर अपने घर जा रहा था। इस बीच अलवर के बहरोड़ पुलिया के पास भीड़ ने गाड़ी को रुकवा कर पहलू और उनके बेटों से मारपीट की थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पहलू खान को बहरोड़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 4 अप्रैल 2017 को उनकी मौत हो गई थी।

यह मामला राजस्थान से लेकर दिल्ली तक उठा था। इस मामले में वसुंधरा सरकार को देशभर में आलोचना झेलनी पड़ी थी। पिछले दिनों सरकरा ने विधानसभा में मॉब लिंचिंग कानून पारित कराया है।