भाजपा के भी संपर्क में थे शरद पवार, इस शर्त की वजह से पीएम मोदी ने साथ सरकार बनाने से किया था मना

सूत्रों का कहना है कि इन दोनों मांगों को मानने के लिए शरद पवार ने भाजपा और मोदी-शाह को संदेश भेजकर विचार के लिए वक्त दिया था। यही वजह है कि नतीजे आने के बाद पवार ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ ऐसा कुछ तीखा नहीं बोला था

Written by: November 29, 2019 5:50 pm

नई दिल्ली। भाजपा को समर्थन देने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने दो शर्ते रखी थीं। पहली शर्त थी केंद्र की राजनीति में सक्रिय बेटी सुप्रिया सुले के लिए भारी भरकम कृषि मंत्रालय और दूसरी देवेंद्र फडणवीस की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाना। जब यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आई तो वह सरकार बनाने के लिए इन शर्तों को मानने को तैयार नहीं हुए।

pm modi sharad pawar

भाजपा सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि पार्टी नेतृत्व को लगा कि अगर महाराष्ट्र में समर्थन हासिल करने के लिए राकांपा को कृषि मंत्रालय दे दिया गया, तो फिर बिहार में पुराना सहयोगी जद(यू) रेल मंत्रालय के लिए दावा ठोक कर धर्मसंकट पैदा कर सकता है। ऐसे में प्रचंड बहुमत के बावजूद दो बड़े मंत्रालय भाजपा के हाथ से निकल सकते हैं।

pm modi sharad pawar

सूत्रों ने पवार की दूसरी शर्त के बारे में बताया कि जिस तरह से महाराष्ट्र जैसे राज्य में देवेंद्र फडणवीस पांच साल तक बेदाग सत्ता चलाने में सफल रहे और विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा, 24 अक्टूबर को नतीजे आने के दिन पार्टी मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फडणवीस के ही नेतृत्व में सरकार बनने की घोषणा की थी, इसके बाद फडणवीस की जगह किसी दूसरे को सीएम बनाने की शर्त मानना भी भाजपा के लिए नामुमकिन था।

pm modi sharad pawar maharshtra

सूत्रों का कहना है कि इन दोनों मांगों को मानने के लिए शरद पवार ने भाजपा और मोदी-शाह को संदेश भेजकर विचार के लिए वक्त दिया था। यही वजह है कि नतीजे आने के बाद पवार ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ ऐसा कुछ तीखा नहीं बोला था, जिस पर भाजपा से जवाबी प्रतिक्रिया आने की गुंजाइश रहती। बयानबाजी सिर्फ शिवसेना और भाजपा के बीच होती रही।

sharad pawar

सूत्रों का कहना है कि मांगों पर भाजपा की तरफ से सकारात्मक रुख न मिलने पर 20 अक्टूबर को जब संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शरद पवार मिले तो करीब 45-50 मिनट लंबी बातचीत चली। हालांकि इस मुलाकात में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शरद पवार की दोनों मांगों पर राजी नहीं हुए और न ही उन्होंने खुलकर कुछ कहा। इस बीच 22 नवंबर को रातोंरात शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने बागी होकर भाजपा के साथ सरकार बनाने की पेशकश कर दी। शुरुआती खबरों में कहा गया कि अजित पवार के साथ 30-35 विधायक टूटकर भाजपा के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।

sharad pawar

यह भी कहा जाने लगा कि इसमें शरद पवार की भी मौन सहमति है। मगर बाद में शरद पवार ने ट्वीट कर भाजपा के साथ राकांपा के गठबंधन की बात खारिज करते हुए कहा कि सरकार में शामिल होने का अजित पवार का फैसला निजी है।

sharad pawar 1

सूत्र बताते हैं कि शरद पवार को आखिर तक उम्मीद थी कि शिवसेना के साथ छोड़ने के कारण असहाय हुई भाजपा उनकी दोनों बड़ी मांगें मान लेगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। आखिरकार शरद पवार ने कांग्रेस और शिवसेना के साथ ही सरकार बनाने का अंतिम कदम उठाया। शरद पवार को मालूम था कि 54 विधायक होने के कारण उनके दोनों हाथों में लड्ड है। एक तरफ जाने पर उनके सिर पर चाणक्य बनने का सेहरा बंधेगा और भाजपा की तरफ जाने पर केंद्र सरकार में भागीदारी सहित अधिकतम लाभ मिलने की गुंजाइश है।

sharad pawar and narendra modi

संघ और भाजपा मामलों के जानकार नागपुर के दिलीप देवधर ने आईएएनएस से कहा, “संघ परिवार में शरद पवार की इन दो शर्तों की काफी चर्चा रही, हालांकि उससे भी ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दबावों के आगे न झुकने की रही। महाराष्ट्र में किसानों का प्रमुख मुद्दा होने के कारण वहां की राजनीति के लिए कृषि मंत्रालय काफी मुफीद रहता है। शरद पवार पूर्व में कृषि मंत्री रह भी चुके हैं। दूसरा मुख्यमंत्री पद के लिए फडणवीस मोदी की ही खोज रहे हैं, ऐसे में उन्हें साइडलाइन करने का प्रश्न ही नहीं उठता था। शरद पवार को जब लगा कि भाजपा उनकी मांगों को नहीं मानने वाली है, तो उन्होंने आखिरकार कांग्रेस-शिवसेना के साथ पहले से सरकार बनाने को लेकर चल रही बातचीत को ही मुकाम पर पहुंचाने का फैसला किया।