जंग में तब्दील हुआ अध्यक्ष का पद, कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश बना सोनिया गांधी की आफत

दिग्विजय सिंह में हांगकांग का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां की लड़ाई युवा लड़ सकते हैं तो मध्यप्रदेश में युवा कमान क्यों नही संभाल सकते? उन्होंने अंतिम फैसला सोनिया गांधी के हाथ में होने की बात की।

Written by: September 1, 2019 12:44 pm

नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर पदों की लड़ाई अपने चरम पर है। लोकसभा चुनाव में हाशिए पर आ चुकी इस पार्टी के नेता आपस में ही महत्वपूर्ण पदों पर कब्जे की लड़ाई लड़ रहे हैं। कांग्रेस के भीतर कर्नाटक में दो खेमों के बीच प्रदेश अध्यक्ष पद पर कब्जे की लड़ाई चल रही है। इस बीच मध्यप्रदेश में यह लड़ाई तीन खेमो में बंट चुकी है।

मध्य प्रदेश में फिलहाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद कमलनाथ के पास है। मगर अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों ने इसके लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है। कमलनाथ सरकार के कुछ मंत्री भी सिंधिया के हक में आ चुके हैं। इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर और गोविंद राजपूत ने खुलकर सिंधिया का समर्थन कर दिया है। मगर कमलनाथ इस पद पर अपने किसी करीबी को ही बिठाना चाहते हैं।kamalnath

इस बीच दिग्विजय सिंह भी लड़ाई में कूद पड़े हैं। उन्होंने किसी 25 साल की उम्र के युवा व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग की है। दिग्विजय सिंह में हांगकांग का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां की लड़ाई युवा लड़ सकते हैं तो मध्यप्रदेश में युवा कमान क्यों नही संभाल सकते? उन्होंने अंतिम फैसला सोनिया गांधी के हाथ में होने की बात की। कुछ ऐसा ही हाल कर्नाटक का भी है जहां सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच अध्यक्ष पद की लड़ाई तेज हो चली है।

डीके शिवकुमार कई मौकों पर कांग्रेस के लिए संकटमोचक की भूमिका निभा चुके हैं। उनका दर्द है कि पहले भी कई बार उनके नाम की प्रदेश अध्यक्ष के लिए चर्चा की गई मगर उन्हें यह पद नहीं दिया गया।jyotiraditya scindhia

उधर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया किसी भी सूरत में डीके शिवकुमार को यह पद देने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी तरह से कर्नाटक में नेता विपक्ष पद के लिए भी डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच झगड़ा जारी है।