राफेल डील: कांग्रेस का पर्दाफाश, मोदी सरकार का सौदा इतना सस्ता, अधिकारी ने बताई सच्चाई

Written by: September 27, 2018 9:34 pm

नई दिल्ली। जिस तरह राफेल सौदे पर देश में चर्चा हो रही है, और सियासत रोज नया रुख ले रही है। ऐसे में इससे जुड़ी कई अहम जानकारियां भी सामने आई हैं। सामने आई नई जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस बेनकाब हो रही है और इससे साफ जाहिर होता है कि मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए ये झूठी खबर फैलाई गई है। तत्कालीन अधिकारी ने टीवी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में कांग्रेस की पोल खोलकर रख दी है।जानकारी के मुताबिक, राफेल सौदा यूपीए से 1.6 अरब डॉलर सस्ता है। साथ ही अहम खबर ये सामने आई है कि रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राजीव वर्मा जो कि फ्रांस के साथ बातचीत करने वाली समिति के सदस्य भी थे, उन्हें लेकर ये झूठी खबर फैलाई गई थी कि रक्षा मंत्रालय से मतभेद होने के कारण उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया था। अधिकारी ने एक अंग्रेजी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वो लंदन में थे और जब लौटे तो उन्होंने भी अखबार में पढ़ा कि उनके लंदन दौरे को लेकर झूठी खबर फैलाई जा रही है, जबकि वो अपने आधिकारिक दौरे पर लंदन गए थे, जो पहले से तय था।Protest Rafale Deal issue

बता दें कि कांग्रेस की तरफ से गुरुवार को कहा गया कि मोदी सरकार ने व्हिसल-ब्लोअर संयुक्त सचिव (वायु) को किनारे कर दिया है, जिन्होंने 36 राफेल के लिए अतिरिक्त 300 फीसदी राशि का भुगतान कर सरकारी खजाने को हुए नुकसान को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद अधिकारी ने मामले में पूरी सच्चाई बताई।

इस तरह से सस्ता साबित हुआ सौदा

भारत ने 36 विमान खरीदने के लिए फ्रांस के साथ अंतर-सरकारी समझौता किया। यूपीए के दौर की 18 विमान खरीद के हिसाब से 36 विमानों की बेसिक कीमत 950.3 करोड़ यूरो होती थी, लेकिन मोदी सरकार ने बातचीत कर इसकी अंतिम कीमत सिर्फ 788.9 करोड़ यूरो तय की। इसमें से भी फ्रांस 50 फीसदी ऑफसेट के लिए निर्धारित करने पर राजी हुआ, यानी वह इसका 50 फीसदी भारत में निवेश करेगा।

भारत सरकार का यह भी कहना है कि इस कीमत के भीतर ही भारत की जरूरतों के मुताबिक विमान में 13 बदलाव किए जाने हैं। इस तरह सरकार का दावा है कि यह सौदा यूपीए से 1.6 अरब डॉलर सस्ता है। सरकार ने फ्रांस के साथ हुए डील की शर्तों के मुताबिक इन आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन अब देश में इस पर काफी विवाद की स्थ‍िति को देखते हुए सरकार आंकड़ों को सार्वजनिक करने के लिए फ्रांस सरकार से आग्रह कर सकती है।

कतर को सस्ता विमान मिलने पर वायु सेना का कहना है कि उसका फ्रांस के साथ कोई ऑफसेट समझौता नहीं है और उसने सिर्फ बेसिक एयरक्राफ्ट लेने का सौदा किया है।