राफेल के मामले में झूठ का “पहाड़” खड़ा कर चुके हैं राहुल गांधी, ये रहे सबूत

इससे पहले राहुल गांधी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मेक्रां के साथ बातचीत की झूठी कहानी भी गढ़ चुके थे। राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार गोपनीयता की आड़ लेकर राफेल विमान सौदे की कीमत नहीं बता रही है

Avatar Written by: November 14, 2019 7:00 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में राहुल गांधी की माफी मंजूर कर ली है और साथ ही उन्हें चेतावनी भी जारी की है। मगर राहुल गांधी ने राफेल के मामले में पहली बार झूठ नही बोला है। वे इस मामले में सीरियल ”लायर” साबित हो चुके हैं।   राहुल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने इस झूठ को स्वीकार किया।

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उन्होंने कहा, मैं मानता हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी नहीं कहा कि ‘चौकीदार चोर है’। मेरी ओर से यह बयान चुनाव प्रचार के दौरान उत्तेजना में दिया गया था। मैं आगे से पब्लिक में ऐसी टिप्पणी नहीं करूंगा, जब तक कि कोर्ट में ऐसी बात रिकॉर्ड में न कही गई हो।  राहुल गांधी ऐसी झूठी बात पहली बार नही कही। न ही पहली बार उन्हें इस झूठ को कुबूलने पर मजबूर होना पड़ा।

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इससे पहले राहुल गांधी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मेक्रां के साथ बातचीत की झूठी कहानी भी गढ़ चुके थे। राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार गोपनीयता की आड़ लेकर राफेल विमान सौदे की कीमत नहीं बता रही है, जबकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने उन्हें ये बताया है कि भारत और फ्रांस के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है।  राहुल यहीं नही रूके।

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उन्होंने ये भी कह दिया कि मेक्रों ने उन्हें यहां तक कहा है कि आप अपने देश में सभी को ये बात बता सकते हैं। ये बात पूरी तरह झूठी साबित हुई। दोनो देशों के बीच साल 2008 में गोपनीयता को लेकर सुरक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत कोई भी देश कीमत को सार्वजनिक नहीं कर सकता था।  फ्रांस की सरकार ने राहुल के सारे दावों को झूठा साबित कर दिया।

इसी तरह फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के नाम का इस्तेमाल कर राहुल ने मोदी सरकार पर हमला करने की कोशिश की। फ्रांस की मीडिया में फ्रांस्वा ओलांद का एक बयान सामने आया जिसमें दावा किया गया कि राफेल विमान बनाने के समझौते में भारत सरकार ने ही रिलायंस डिफेंस का नाम सुझाया था। राहुल गांधी ने तुरंत इस बयान को लपक लिया। मोदी सरकार पर हमला करना शुरू कर दिया।

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इस बीच फ्रांस की सरकार ने एक बयान जारी करके कहा कि फ्रांस की सरकार किसी भी तरह से भारतीय औद्योगिक साझेदारों के चयन में शामिल नहीं है। उनका चयन फ्रांस की कंपनियों को करना होता है, जिसकी उन्हें पूरी आजादी होती है। राहुल गांधी का झूठ एक बार फिर से बेनकाब हो गया।

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राहुल ने ऐसा ही झूठ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचएएल को लेकर भी बोला।  एक रिपोर्ट में दावा किया कि एचएएल वित्तीय संकट से जूझ रही है। कर्मचारियों को सैलरी तक देने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। राहुल ने इसी आधार पर निर्मला सीतारमण से इस्तीफे की मांग उठा दी। मगर इसी बीच एचएएल ने एक बयान जारी कर कहा कि उसकी वित्‍तीय हालत में सुधार हो रहा है। यही नही बल्कि 15 हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टरों और 83 हल्के लड़ाकू विमानों का ऑर्डर अपने अंतिम चरण में है। इन विमानों से एचएएल की वित्तीय स्थिति में सुधार की पूरी संभावनाएं हैं। राहुल गांधी की बोलती एक बार फिर से बंद हो गई।