पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर पहुंचे राज ठाकरे, मुंबई के कई इलाकों में धारा 144 लागू

ईडी की पूछताछ से पहले राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। बुधवार को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे उनके समर्थन में उतर आए। उद्धव ने कह कि मुझे नहीं लगता कि पूछताछ में कुछ सामने आएगा।

Avatar Written by: August 22, 2019 2:15 pm

नई दिल्ली। गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) चीफ राज ठाकरे पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर पहुंचे। ईडी ने कोहिनूर सीटीएनएल में आईएल एंड एफएस ग्रुप के कर्ज और निवेश की जांच के सिलसिले में उन्हें समन भेजा था। उनकी पेशी से पहले मुंबई के इलाकों में मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किए गए।

Enforcement Directorate

जिस वक्त राज ठाकरे ईडी दफ्तर जा रहे थे उस दौरान उनके घर से लेकर ईडी ऑफिस तक सुरक्षाबल तैनात किए गए थे। जिसमें कुछ जगहों पर धारा 144 भी लगाई गई थी। जिसमेंं मरीन ड्राइव, एमआरए मार्ग, दादर, आजाद मैदान के इलाके शामिल हैं।

धारा 144 के अलावा प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर जाने वाली सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। और यहां पर किसी भी वाहन के आने की अनुमति नहीं है। मुंबई में ED का दफ्तर पश्चिम इलाके में बल्लार्ड एस्टेट में है। मुंबई पुलिस की ओर से इन जगहों पर लोगों से ना जाने की अपील की गई है, क्योंकि यहां जाम की स्थिति बन सकती है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस भी तैनात हैं।

ईडी की पूछताछ से पहले राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है। बुधवार को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे उनके समर्थन में उतर आए। उद्धव ने कह कि मुझे नहीं लगता कि पूछताछ में कुछ सामने आएगा। इसलिए हमें एक से दो दिन रुकना चाहिए। दूसरी ओर, मनसे ने ईडी की कार्रवाई को बदले की राजनीति बताया।

बता दें कि आईएल एंड एफएस ने कोहिनूर सीटीएनएल को लोन दिया था और इक्विटी इन्वेस्टमेंट भी किया था। सीटीएनएल ने लोन पेमेंट में डिफॉल्ट कर दिया। सीटीएनएल में राज ठाकरे भी पार्टनर थे। हालांकि, बाद में वे अपने शेयर बेचकर बाहर हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज ने उसी साल शेयर बेचे, जब आईएलएंडएफएस ने घाटे में सीटीएनएल के शेयर बेचे थे।

ईडी ने राज ठाकरे के अलावा महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना नेता मनोहर जोशी के बेटे अनमेश को भी समन भेजा है। अनमेश का कोहिनूर ग्रुप कोहिनूर सीटीएनएल का पूर्व प्रमोटर है। कोहिनूर कंपनी लोन डिफॉल्टर है जिसे ठाकरे और अनमेश ने कंसोर्शियम के जरिए बनाई थी। बाद में ठाकरे ने अपने शेयर बेच दिए थे।