अयोध्या मामले के ऐतिहासिक फैसले के बाद ये है मोदी सरकार का अगला एजेंडा, राजनाथ सिंह ने दिए संकेत

अयोध्या राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फाइनल फैसले के बाद सरकार का अगला एजेंडा कॉमन सिविल कोड हो सकता है। जिसके संकेत आज केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दिए हैं। आपको बताते चलें कि भाजपा नेता और समर्थक अब समान नागरिक संहिता की बात भी करने लगे हैं।

Written by: November 10, 2019 2:03 pm

नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फाइनल फैसले के बाद सरकार का अगला एजेंडा कॉमन सिविल कोड हो सकता है। जिसके संकेत आज केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दिए हैं। आपको बताते चलें कि भाजपा नेता और समर्थक अब समान नागरिक संहिता की बात भी करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर फैसले के बाद ही कई लोग अब समान नागरिक संहिता की बारी जैसी बातें करते दिखाई दे रहे हैं।

rajnath singh

दरअसल देहरादून में पत्रकारों ने जब राजनाथ सिंह ने सवाल किया तो उन्होंने बड़ा बयान दिया। रक्षामंत्री ने कहा अब कॉमन सिविल कोड का भी वक्त आ गया है। बीजेपी जो कहती है वही करती है। कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है।

Ram Mandir

गौरतलब है कि शनिवार को राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील अयोध्या मामले पर आया फैसला एक से ज्यादा मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि शीर्ष अदालत के 69 साल के इतिहास में शनिवार को सुनाया जाने वाला संभवत: यह पहला फैसला है।

ranjan gogoi

शीर्ष अदालत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि न्यायमूर्ति सोमवार से शुक्रवार तक सप्ताह में पांच दिन मुकदमों की सुनवाई करते हैं। विशेष परिस्थितियों में न्यायालय में शनिवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी सुनवाई होती है। लेकिन संभवत: यह पहली बार था जब भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शनिवार को इतना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Ayodhya celebrations

सदी से भी ज्यादा पुराने इस विवाद पर शनिवार को फैसला सुनाते हुए उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या की विवादित जमीन पर सरकार की ओर से गठित न्यास की निगरानी में राम मंदिर बनाने को कहा और साथ ही कहा कि अयोध्या में ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन खोजी जाए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने भारतीय इतिहास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस व्यवस्था के साथ ही करीब 130 साल से चले आ रहे इस संवेदनशील विवाद का पटाक्षेप कर दिया। पीठ ने कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला की मूर्ति को सौंप दिया जाए, हालांकि इसका कब्जा केन्द्र सरकार के रिसीवर के पास ही रहेगा।