कश्मीर में लोकल आतंकियों की भर्ती पर लगा ताला, सुरक्षाबलों की सख्ती ने होश ठिकाने किए

जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने खुद इस बात का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कुछ युवा पहले ही रास्ता भटक कर आतंकियों के साथ चले गए थे। सुरक्षा बल उनके साथ संपर्क में हैं और उन्हें मेनस्ट्रीम में वापस लेने की लाने की कोशिश कर रहे हैं।

Written by: September 11, 2019 6:07 pm

श्रीनगर। कश्मीर से एक बड़ी हौसला बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। 370 हटने के बाद से स्थानीय युवा आतंकवादी कैंपों का हिस्सा बनने को तैयार नही हुए हैं। हाल फिलहाल में कोई भी लोकल युवा आतंकवाद की राह पर जाता नहीं पाया गया है। आतंकियों के लिए भी लोकल भर्तियां नामुमकिन हो चली हैं।

जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने खुद इस बात का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कुछ युवा पहले ही रास्ता भटक कर आतंकियों के साथ चले गए थे। सुरक्षा बल उनके साथ संपर्क में हैं और उन्हें मेनस्ट्रीम में वापस लेने की लाने की कोशिश कर रहे हैं। मगर नई भर्तियों पर लगाम लग जाने से पाकिस्तान के हौसले ठप हो गए हैं।

Indian Army CRPF BSF Jammu Kashmir

जानकारी के मुताबिक शोपियां और अनंतनाग जैसे जिलों में भी आतंकी लोकल युवाओं को अपने साथ लेने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद आतंकियों ने इस बात की पुरजोर कोशिश की थी कि वे युवाओं को गुमराह करने में कामयाब हो जाएं मगर उन्हें सख्त नाकामी हाथ लगी है। इस बीच सेना ने गुलमर्ग सेक्टर में दो पाकिस्तानी आतंकियों की तस्दीक की है। इन्हें मौत के घाट उतारने का मिशन जारी है।

इससे पहले सेना ने मोहम्मद खलील और मोहम्मद नाजिम नाम के रावलपिंडी के दो लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का वीडियो रिलीज किया था। इसमें इन्होंने पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ कर कश्मीर में आतंकी हरकतों को अंजाम देने के प्लान की पुष्टि की थी। कश्मीर पुलिस के मुताबिक घाटी में धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर आ रही है।

Taliban-terrorists-Afghanistan

हालांकि इस बीच दक्षिण कश्मीर में आतंकवादियों ने कुछ फल व्यवसायियों को जरूर धमकाया है। उन्हें फल इकट्ठा न करने की चेतावनी दी गई है। मगर लोग इसे मानने से इंकार कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस बात की जानकारी दी कि दक्षिणी कश्मीर के एक जिले से 230 से ज्यादा ट्रकों में फल बाहर की मार्केट में भेजे भेजे गए हैं। यह आम लोगों के मुख्यधारा को स्वीकार करने की बड़ी निशानदेही है।