यूनीसेफ इंडिया के कार्यक्रम में बोले सचिन तेंदुलकर, बच्चों पर अपने सपने मत थोपिए (वीडियो)

Written by: November 22, 2018 5:34 pm

नई दिल्ली। क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने यूनीसेफ इंडिया के कार्यक्रम में मंच से बच्चों के अभिभावकों को संदेश देते हुए कहा है कि उन्हें बच्चों को उनके सपने सच करने में मदद करनी चाहिए न कि उन पर अपने सपने थोपने चाहिए।Sachin Tendulkar UNICEF India Program World Childrens Day

सचिन ने त्यागराज स्टेडियम में विश्व बाल दिवस के मौके पर यूनिसेफ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने माता-पिता और बच्चों को संदेश देते हुए यह बात कही। सचिन ने कहा कि बच्चें गलतियां करेंगे लेकिन माता-पिता को इस दौरान उनकी ताकत बनना है।

सचिन ने कहा, “वह गलतियां करेंगे, लेकिन उनके पंख मत काटिए। उनकी ताकत बनिए, उन्हें समझिए, उनके साथ खड़े रहिए। बच्चों पर अपने सपने मत थोपिए, उन्हें अपने सपने पूरे करने दीजिए।”

इस कार्यक्रम के दौरान एल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने भी सचिन तेंदुलकर से सीधा संवाद स्थापित किया और मंच पर उनके साथ उपस्थिति दर्ज कराते हुए कई सवाल किए। सचिन ने बच्चों के सभी सवालों का बड़ी हीं सहजता के साथ जवाब भी दिया।

इससे पहले सचिन तेंदुलकर के साथ एल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने काफी समय भी गुजारा और उनसे ढेर सारे अन्य मुद्दों पर भी बातचीत की।

सचिन ने कहा, “हमारी अपनी समस्याएं होती हैं, लेकिन हमारे जुनून के कारण हमारा ध्यान बंट जाता है। ध्यान हमेशा समस्या के समाधान ढूढ़ने पर होना चाहिए न कि समस्या पर। हर चीज के लिए तैयारी की जरूरत होती है। अगर आप तैयारी करने में असफल होते हैं तो आप असफल होने के लिए तैयारी कर रहे हैं। इस बात को समझिए। हमें हर चीज के लिए तैयारी करनी होती है। मुझे भी हर मैच के लिए तैयारी करनी पड़ती थी।”

सचिन ने आगे कहा, “सफलता की कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन अगर आप ईमानदारी और प्रतिबद्धता से मेहनत करते हैं तो आप एक दिन जरूर अपने माता-पिता को गर्व करने का मौका देंगे। तैयारी में हमेशा अपना 100 फीसदी दीजिए. परिणाम आपका साथ देंगे।” सचिन यूनीसेफ के गुडविल ब्रांड एम्बेसेडर हैं। बच्चों को संबोधित करने के बाद उन्होंने बच्चों के साथ एक प्रदर्शनी फुटबाल मैच में भी हिस्सा लिया।

सचिन तेंदुलकर ने युवाओं को अपने सपनों का पीछा करने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि बचपन में वह भी काफी शरारती थे लेकिन भारत की तरफ से खेलने का लक्ष्य हासिल करने के लिये वह खुद ब खुद अनुशासित हो गये। यूनिसेफ के ब्रांड दूत तेंदुलकर ने सोमवार को विश्व बाल दिवस के अवसर पर अपना समय न सिर्फ बच्चों के साथ बिताया बल्कि उनके साथ क्रिकेट भी खेली और लंबे समय बाद बल्ला भी थामा। उन्होंने स्पेशल ओलंपिक भारत से जुड़े विशेष श्रेणी के बच्चों को क्रिकेट के गुर भी सिखाये।

इस मौके पर तेंदुलकर ने कहा कि बचपन में वह भी बहुत शरारती थे लेकिन जब भारत के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया तो अपना लक्ष्य तय कर लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देख और सारी शरारतें अपने आप चली गईं। सचिन ने कहा कि जीवन में अनुशासन काफी अहम हैं और जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा होता है।

अपने पहले क्रिकेट मैच को याद करते हुए तेंदुलकर ने कहा, ‘मैं तब 16 साल का था जब पाकिस्तान गया और इसके बाद 24 साल तक खेलता रहा। इस बीच मैंने भी उतार चढ़ाव देखे लेकिन मैं हमेशा अपने सपनों के पीछे भागता रहा। मेरे क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा क्षण 2011 में विश्व कप में जीत थी और इसके लिये मैंने 21 साल तक इंतजार किया।’

फुटबॉल खेल सचिन ने बच्चों को खेल के प्रति किया जागरूक

यूनीसेफ की ओर से विश्व बाल दिवस पर मंगलवार को त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को खूब खेलने की सलाह दी। बच्चों को खेल के प्रति प्रेरित करने को उनके साथ फुटबॉल भी खेला। उन्होंने कहा कि खेलों में सभी को एक साथ लाने की शक्ति होती है, इसलिए बच्चों को खूब खेलना चाहिए।

सचिन ने कहा कि खेलते समय कोई भी किसी का रंग, आर्थिक स्थिति आदि के बारे में बात नहीं करता है। सभी का लक्ष्य जीत होता है। इसके लिए पूरी टीम मिलकर काम करती है। इसलिए मैं हमेशा स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने की बात करता हूं। खेल के मैदान में हम ऐसे सबक सीखते हैं जिनका इस्तेमाल हम अपने पूरे जीवन में करते हैं। उन्होंने बच्चों से कहा कि उन्हें खेल और पढ़ाई में तालमेल बनाना होगा। बच्चे अपने अभिभावकों की बात जरूर मानें क्योंकि वे हमेशा आपका भला चाहते हैं। स्कूलों को शिक्षा और खेलों को साथ-साथ लेकर चलना होगा। स्कूलों में साफ-सुथरे शौचालय होने चाहिए ताकि किसी बच्चे की स्कूल में शौचालय न होने के कारण पढ़ाई न छूटे।