शरद पवार ने शिवसेना को दी जोरदार पटखनी, धरा रह गया सीएम बनने का ख्वाब

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें सियासत की नब्ज़ समझने वाला क्यों माना जाता है? शरद पवार ने अपने अनुभव से यह समझ लिया था कि शिवसेना किसी भी सूरत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी।

Written by: November 12, 2019 5:05 pm

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें सियासत की नब्ज़ समझने वाला क्यों माना जाता है? शरद पवार ने अपने अनुभव से यह समझ लिया था कि शिवसेना किसी भी सूरत में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी। उल्टे शिवसेना के साथ जाने से एनसीपी के अपने मतदाताओं का संकट खड़ा हो जाएगा। इसीलिए ऐसी रणनीति बनाई गई कि शिवसेना बुरी तरह एक्सपोज हो जाए और सरकार भी लटक जाए।

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यही वजह है कि एनसीपी नेताओ ने सरकार बनाने में दिलचस्पी न लेने का फैसला किया। एनसीपी ने साफ कर दिया कि जब तक तीनों पार्टियां एक साथ बैठकर बात नहीं करेंगी तब तक एनसीपी कोई भी फैसला नहीं लेगी। उधर कांग्रेस भी पसोपेश में थी। उसके विधायक राजस्थान में थे। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि दिल्ली में होने वाली कोर कमेटी की बैठक के बाद तय होगा कि कांग्रेस किसे समर्थन देगी।

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इस बीच मातोश्री पर शिवसेना की अहम बैठक हुई। इसमें शिवसेना के सीनियर नेता रामदास कदम, विनायक राऊत, अनिल देसाई, अरविंद सावंत, एकनाथ शिंदे, सुभाष देसाई व तानाजी सावंत शामिल हुए। शिवसेना ने सरकार गठन की प्रक्रिया तेज करने की भरसक कोशिश की। उसने न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार करने के लिए टीम का गठन किया पर एनसीपी नहीं मानी।

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इसमें एक आम भूमिका ओवैसी ने भी निभाई। उन्होंने साफ कर दिया कहा कि महाराष्ट्र में खेल हो रहा है, हम न तो बीजेपी का समर्थन करेंगे और न ही शिवसेना का।दोनों हिंदूवादी पार्टी हैं, जिसके पास नंबर है वह अपनी सरकार बना ले। हम किसी को सपोर्ट नहीं करेंगे। इस घटनाक्रम से भी सेकुलर राजनीति करने का दावा करने वाली पार्टियों को शिवसेना के साथ खड़े होने में मुश्किल पैदा हुई।