देवेंद्र फडणवीस से बुरी तरह चिढ़ी हुई है शिवसेना, सामना में उगला ‘ज़हर’

शिवसेना की सबसे ज्यादा नाराजगी महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से है। अपने सामना अखबार के जरिए वह देवेंद्र फडणवीस पर लगातार वार कर रही है। सामना के ताजा अंक में शिवसेना ने नेता विपक्ष के पद पर देवेंद्र फडणवीस की नियुक्ति पर भी सवाल उठा दिए हैं।

Written by: December 2, 2019 10:53 am

नई दिल्ली। शिवसेना की सबसे ज्यादा नाराजगी महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से है। अपने सामना अखबार के जरिए वह देवेंद्र फडणवीस पर लगातार वार कर रही है। सामना के ताजा अंक में शिवसेना ने नेता विपक्ष के पद पर देवेंद्र फडणवीस की नियुक्ति पर भी सवाल उठा दिए हैं। शिवसेना ने बीजेपी खेमे में तोड़फोड़ कर अपनी संख्या बढ़ाने का संकेत भी दिया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा है कि सरकार के साथ 170 विधायकों का बल है। ये हम पहले दिन से कह रहे थे। परंतु फडणवीस के चट्टे-बट्टों के चश्मे से ये आंकड़ा 130 के ऊपर जाने को तैयार नहीं था। 170 की संख्या देखकर फडणवीस के नेतृत्व वाला विपक्ष विधानसभा से भाग खड़ा हुआ।

Devendra Fadnavis, Uddhav Thackeray

शिवसेना ने स्पीकर की नियुक्ति के बहाने भी फडणवीस पर हमला बोला और यहां तक कह दिया कि फडणवीस को बोलना है या नहीं, यह अब स्पीकर ही तय करेंगे। शिवसेना ने सामना में लिखा है कि प्रधानमंत्री से बगावत करके सांसद के पद से इस्तीफा देनेवाले पहले भाजपाई क्रांतिवीर के रूप में नाना पटोले का नाम दर्ज है। विधानसभा में भी वे जीत गए और अब विधानसभा के अध्यक्ष बन गए। मोदी किसी को बोलने नहीं देते, ऐसा पटोले का कहना था। अब विधानसभा में फडणवीस को बोलना है या नहीं यह नाना पटोले तय करेंगे। विपक्ष के नेता खुद अपनी पद व प्रतिष्ठा बचाए रखेंगे तो सब ठीक होगा।

Nana Patole

शिवसेना ने शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे का उदाहरण देते हुए भी फडणवीस पर वार किया। सामना में लिखा कि मुख्यमंत्री की हैसियत से देवेंद्र फडणवीस ने जो गलतियां कीं वह विरोधी पक्ष नेता के रूप में तो उन्हें नहीं करनी चाहिए। विपक्ष के नेता पद की शान व प्रतिष्ठा बरकरार रहे, ऐसी हमारी इच्छा है। दरअसल, यह भारतीय जनता पार्टी का अंदरूनी मामला है कि किसे विपक्ष का नेता बनाएं अथवा किसे और क्या बनाएं, परंतु राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं आई। वहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विपक्ष की नेता की कुर्सी पर नहीं बैठीं। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पराजित हुई। वहां भी बलशाली माने जानेवाले शिवराज सिंह चौहान विपक्ष के नेता नहीं बने तथा पार्टी के अन्य नेता ने यह पद संभाला। जबकि महाराष्ट्र में दिल्लीवाले ‘फडणवीस ही फडणवीस’ कर रहे हैं।

Devendra Fadnavis and Uddhav Thackeray

शिवसेना ने संख्या बल के मामले मे भविष्य में तोड़फोड़ के संकेत भी दिए। सामना में इस बाबत लिखा गया कि विधानसभा अध्यक्ष पद का चुनाव गुप्त मतदान पद्धति से संपन्न कराया गया होता तो हम जो कहते हैं उस पर मोहर लग गई होती। 170 का बहुमत साधारण नहीं है और कल यह संख्या 185 तक पहुंच गई तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। महाराष्ट्र के राजनैतिक पटल पर जो हुआ है तथा होता देख रहे हैं यह पूरा मामला मतलब भाजपा का ‘कर्मफल’ है।