कांग्रेस ने शीला दीक्षित के बाद सुभाष चोपड़ा पर जताया भरोसा, बने पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष

कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता सुभाष चोपड़ा पर भरोसा जताते हुए उन्हें दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद को राज्य के कैंपेन कमिटी का चीफ बनाया गया है।

Avatar Written by: October 23, 2019 7:34 pm

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित के निधन के बाद से दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद खाली था। इसे लेकर कई सारी अटकलें लगाई जा रही थी। लेकिन अब सब कुछ साफ हो चुका है और कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता सुभाष चोपड़ा पर भरोसा जताते हुए उन्हें दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद को राज्य के कैंपेन कमिटी का चीफ बनाया गया है।

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दिल्ली कांग्रेस का चीफ बनने के लिए कई नेताओं ने दावा किया था लेकिन अंत में सोनिया ने सुभाष चोपड़ा पर भरोसा जताते हुए उन्हें अध्यक्ष बनाया। सोनिया गांधी ने बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद को डीपीसीसी की प्रचार समिति का चेयरमैन चुना है।

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आजाद को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में दी गई है जब भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं ने राहुल गांधी को संदेश भेजकर आजाद या किसी अन्य ‘बाहरी’ नेता को डीपीसीसी का अध्यक्ष नहीं बनाने और किसी युवा चेहरे को कैंपेन चीफ बनाने का आग्रह किया था।

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कांग्रसे की तरफ से जारी बयान के अनुसार, ‘कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांदी ने सुभाष चोपड़ा को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी (डीपीसीसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया है। कीर्ति आजाद को डीपीसीसी की प्रचार समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।’

दिल्ली विधानसभा चुनाव जैसे जैसे करीब आता जा रहा था वहीं नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए कांग्रेस में गहमागहमी तेज हो गई थी। बता दें कि पार्टी आंतरिक गुटबाजी और राजनीतिक समीकरण के कारण पशोपेश में थी। एक तरफ, दिल्ली कांग्रेस के कई नेता कीर्ति आजाद जैसे किसी बाहरी नाम का पुरजोर विरोध कर रहे थे तो दूसरी तरफ नेताओं का एक धड़े का कहना था कि किसी ऐसे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दी जाए जो सबको स्वीकार्य हो और पार्टी में गुटबाजी पर अंकुश लगा सके।

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महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद दिल्ली प्रदेश इकाई में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई थी। कांग्रेस आलाकमान के सामने बड़ी चुनौती दिल्ली के सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के साथ ही पार्टी की आंतरिक कलह पर अंकुश लगाने की भी थी। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी किसी युवा नेता के पक्ष में थे। इसी क्रम में कुछ हफ्ते पहले दिल्ली के कुछ युवा नेताओं का साक्षात्कार भी लिया गया था।

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