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खेल

Jhansi: झांसी में तैनात हेड कांस्टेबल के बेटे ने कर दिखाया कमाल, IPL के लिए मुंबई इंडियन्स की टीम में हुआ सेलेक्शन

Jhansi: कांस्टेबल श्यामनाथ सिंह ने अपना अनुभव बताते हुए भावुक होते हुए कहा कि वो अपने दोनों बेटों के लिए किट खरीदने दुकान गए थे लेकिन दोनों के किट खरीद सकूं इस लायक पैसा नहीं था। फिर मैंने सोचा एक ही किट खरीद लेते हैं। सामान बहुत महंगे होते हैं।

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नई दिल्ली। कहते हैं अगर आपके अंदर जज्बा हो तो आप हर वो चीज पा सकते हैं जिसे आप पाना चाहते हैं। कुछ ऐसा ही सपना झांसी पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल श्यामनाथ सिंह के बेटे कुमार कार्तिकेय सिंह का था जो अब पूरा होता हुआ नजर आ रहा है। बता दें, कार्तिकेय सिंह का सेलेक्शन आईपीएल टीम के लिए हुआ है। कार्तिकेय का मुंबई इंडियंस की टीम में सेलेक्शन हुआ है। जैसे ही ये जानकारी झांसी में पुलिस अफसरों को हुई तो पुलिस कप्तान समेत अन्य अफसरों ने श्यामनाथ को शुभकामनाएं दीं और आगामी मैचों में कार्तिकेय से बेहतर प्रदर्शन के लिए उम्मीद जताई।

kartikay singh

मध्यप्रदेश की टीम से खेलते हैं कार्तिकेय

मूल रूप से सुल्तानपुर के रहने वाले कांस्टेबल श्यामनाथ सिंह शूटिंग के खिलाडी रहे हैं। ऐसे में पिता को देखकर ही कार्तिकेय को खेल की ओर जाने की प्रेरणा मिली। कार्तिकेय घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश की ओर से खेलते हैं और अब उन्हें मुंबई इंडियंस के खिलाडी मोहम्मद अरशद खान के चोटिल होने पर उनकी जगह दी गई है।

‘बेटे को जल्द मिले टीम इंडिया की जर्सी’

मीडिया से बात करते हुए श्यामनाथ सिंह ने बताया कि उन्हें तब अपने बेटे के लिए ज्यादा खुशी होगी जब वो इंडियन टीम की जर्सी पहनेगा। कांस्टेबल श्यामनाथ सिंह का कहना है कि उनके बेटे ने फोन करके खुद के आईपीएल में सिलेक्ट होने की जानकारी दी थी।

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क्रिकेट किट खरीदने के नहीं थे पैसे     

कांस्टेबल श्यामनाथ सिंह ने अपना अनुभव बताते हुए भावुक होते हुए कहा कि वो अपने दोनों बेटों के लिए किट खरीदने दुकान गए थे लेकिन दोनों के किट खरीद सकूं इस लायक पैसा नहीं था। फिर मैंने सोचा एक ही किट खरीद लेते हैं। सामान बहुत महंगे होते हैं। पहले मैंने सामान निकलवाया लेकिन पैसे कम होने के चलते उसमें से कुछ सामान काम करवाया। ऐसे करने पर दुकानदार ने उन्हें कहा था कि औकात नहीं है तो क्यों चले आये हो। दुकानदार की ये बातें उन्हें बहुत फील हुई थी कि हम उस लायक नहीं थे, और कुछ कह भी नहीं सकते थे। जो हम ले सकते थे वो, वो लिए। पर पूरी किट नहीं खरीदकर दे पाए।

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