मोदी सरकार का ये अभियान और दिल्ली से खत्म होगा प्रदूषण

इस बार दिल्ली वालों ने दिवाली पर पटाखों नहीं फोड़े यह सोचकर कि उनको प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा, लेकिन नतीजा वही का वही निकला। पंजाब और हरियाणा में जलाई जा रही पराली ने दिल्ली का हवा को जहरीला बना दिया, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।

Avatar Written by: November 5, 2019 5:21 pm

नई दिल्ली। भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण से हालात काफी ज्यादा खराब है और लोग घर से बाहर निकलना नहीं चाहते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में 4 नवंबर से लेकर 15 नवंबर तक ऑड-ईवन फॉर्मूले को लागू किया है, लेकिन इससे भी कुछ खास फायदा नहीं होगा। ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार ने अब जिम्मा उठाया है, दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने का…

delhi pollution health emergency

इस बार दिल्ली वालों ने दिवाली पर पटाखों नहीं फोड़े यह सोचकर कि उनको प्रदूषण से छुटकारा मिलेगा, लेकिन नतीजा वही का वही निकला। पंजाब और हरियाणा में जलाई जा रही पराली ने दिल्ली का हवा को जहरीला बना दिया, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।

pm modi amit shah

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऑड-इवेन लागू कर सोचा था कि अब दिल्ली को प्रदुषण से छुटकारा मिल जाएगा लेकिन यहां भी कोई खास नजीते नहां निकले। केजरीवाल ने केन्द्र सरकार पर भी आरोप मढना शुरू कर दिया कि उन्होने आपात स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की कोई बैठक तक नहीं बुलाई। सरकारी सूत्र बताते हैं कि केन्द्र सरकार सतर्क भी थी और मॉनिटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय से भी हो रही थी।

जावडेकर ने तीन राज्यों के मंत्रियों की बैठक बुलाई थी

Prakash Javadekar

सरकारी सूत्र बताते हैं कि पराली जलाने की घटनाएं यूपीए सरकार के दौर से ही चल रहीं थी। लेकिन इसके लिए जागरुकता बढायी केन्द्र की मोदी सरकार ने। 2015 में प्रकाश जावडेकर ने बतौर पर्यावरण मंत्री तीनों राज्यों की पहली समन्वय बैठक बुलायी थी। इस समस्या से निबटने के लिए एक केन्द्रीय तंत्र की रूपरेखा मौजूदा पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर की ही देन है, जिसके तहत अधिकारियों के स्तर पर तीनों राज्यों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है।

इसके अलावा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी लगातार अपडेट्स से इसे रोकने और जागरुकता बढाने में खासा योगदान देता है। एयर क्वालटी इंडेक्स यानी एक्यूआई को जनता के सामने लाना मोदी सरकार की ही देन है। सरकारी सूत्र बताते हैं कि पराली जलाने की सैटेलाईट इमेज भी जागरूकता बढाने और इससे निजात पाने के उपाय ढूंढने के काम आ रही है जो कि मोदी सरकार के दौरान ही शुरू की गई है।

central pollution control board

एनसीआर में पर्यावरण मंत्रियों की हुई 9 बैठक

सूत्र बताते हैं कि अब तक एनसीआर इलाके के सभी पर्यावरण मंत्रियों की 9 बैठकें पिछले चंद सालों में की जा चुकीं हैं। ताकि इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पायी जा सके। इसके अलावा सचिव स्तर की बातचीत लगातार चलती रहती है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक पंजाब और हरियाणा सरकार को पिछले कुछ सालों में 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं ताकि वो किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए इंसेंटिव दे सकें। साथ ही किसानों को पराली जलाने से रोकने की मशीनें सस्ते मूल्यों पर उपलब्ध करायी जा सके।

मॉनिटरिंग मशीनों की संख्या बढायी गयी

pollution monitoring system

जब एनजीटी और दूसरी एजेंसियों ने लाल झंडी तक नहीं दिखायी थी। तब मोदी सरकार के दौरान ही हर दिन 24 घंटे काम करने वाली मॉनिटरिंग मशीनों को कई स्थानों पर लगाया गया। सूत्र बताते हैं कि लगभग 3000 उद्योगों की हर वक्त मॉनिटरिंग होती है। अगर इन फैक्ट्रियों में प्रदूषण का स्तर बढता है तो उन्हें तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था पर काम करना शुरू करना पड़ता है।

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