संसद भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के वो ‘तीन शब्द’ और गूंज उठी संसद

चौथे दिन देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद को करीब एक घंटे तक संबोधित किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के बिनाह पर नए भारत की परिकल्पना को पेश किया। 

Written by: June 20, 2019 3:21 pm

नई दिल्ली। 17वीं लोकसभा का संसद सत्र चल रहा है और पहले और दूसरे दिन सांसदों ने गोपनियता की शपथ ली। इसके बाद तीसरे दिन पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल सभी मंत्रियों का परिचय कराया। चौथे दिन देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद को करीब एक घंटे तक संबोधित किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के बिनाह पर नए भारत की परिकल्पना को पेश किया।

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लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाया और साथ ही मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की भविष्य की नीतियों के बारे में बताया। राष्ट्रपति कोविंद ने एक घंटे तक अभिभाषण दिया और इस घंटे के दौरान कई मौके ऐसे आएं जब सत्ता पक्ष के सांसदों ने मेजों को थप-थपाकर सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की।

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लेकिन तीन मौके ऐसे भी थे जब मेजों की थप-थपाने की आवाज शांत होने का नाम नहीं ले रही थे और मेजों की थाप की गूंज इतनी थी कि राष्ट्रपति को थोड़ी देर के लिए चुप होना पड़ गया। सांसदों द्वारा मेजों की गड़गड़ाहट के बीच राष्ट्रपति ने दो बार बोलने की कोशिश की लेकिन सांसदों का उत्साह इतना था कि, राष्ट्रपति को अपना संबोधन थोड़ी देर के लिए रोकना पड़ा।

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पहला मौका था जब राष्ट्रपति ने आतंकवादी मसूद अजहर पर हुई हालिया कार्रवाई के बारे में जिक्र किया। राष्ट्रपति ने कहा कि, आज आतंकवाद के मुद्दे पर पूरा विश्व  भारत के साथ खड़ा है। देश में बड़े आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करना इसका बड़ा प्रमाण है। इसके बाद मेजों की थाप से संसद भवन गूंज उठा था।

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इसके बाद राष्ट्रपति ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक बारे में जिक्र किया। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, सीमा पार आतंकवादी ठिकानों पर पहले सर्जिकल स्ट्राइक और फिर पुलवामा हमले के बाद एयर स्ट्राइक करके भारत ने अपने इरादों और क्षमताओं को प्रदर्शित किया है। भविष्य में भी अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद करीब एक मिनट तक सांसदों ने मेजों को थप-थपाकर सराहना की।

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