उन्नाव केस: विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे अखिलेश यादव, योगी सरकार को ठहराया जिम्मेदार

अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश हैदराबाद की घटना को लेकर गुस्से में था। खासकर बहनें और माताएं। और उसके बाद उन्नाव की घटना उसी तरह से हुई। उन्नाव की घटना बीजेपी सरकार में पहली नहीं है।

Written by: December 7, 2019 12:21 pm

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव उन्नाव रेप केस के खिलाफ यूपी विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। अखिलेश यादव के साथ ही उनकी पार्टी के अन्य नेता भी उनके साथ धरने पर बैठे हैं।

akhilesh yadav

अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश हैदराबाद की घटना को लेकर गुस्से में था। खासकर बहनें और माताएं। और उसके बाद उन्नाव की घटना उसी तरह से हुई। उन्नाव की घटना बीजेपी सरकार में पहली नहीं है। जो बेटी के साथ हुआ। वह बहादुर थी। उसकी आखिरी शब्द थे की वह जिंदा रहना चाहती थी। सफदरजंग के डॉक्टरों की कोशिशों के बाद भी उसकी जान नहीं बच पाई। हमारे लिए यह काला दिवस है। एक बेटी जो न्याय मांग रही थी हम उसे न्याय नहीं दे पाए।

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उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार के राज में यह पहली घटना नहीं है। याद कीजिए जब मुख्यमंत्री आवास के सामने एक बेटी न्याय मांग रही थी और उसे आत्मदाह की कोशिश करनी पड़ी तब जाकर मुकदमा लिखा गया। याद कीजिए बाराबंकी के उस बेटी की घटना जो यहीं मुख्यमंत्री आवास पर आई थी न्याय मांगने के लिए। उसने भी आत्मदाह किया और बाद में उसकी जान नहीं बची। उन्नाव की एक बेटी का तो पूरा परिवार खो दिया। कौन दोषी था, भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोषी थी। यह बेटी जिसकी जान गई है तो उसके भी कोई दोषी हैं तो वह सरकार है क्योंकि सरकार की जानकारी में था।

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अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं वो भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग हैं। जब उसका पूरा शरीर जला तो वो भागी ताकि लोग उसकी गुहार सुनें। भारतीय जनता पार्टी सरकार पहले दिन से कह रही थी कि कानून-व्यवस्था ठीक की जाएगी। इसी सदन में मुख्यमंत्री ने कहा था। मुख्यमंत्री कहते हैं कि जो अपराध करेंगे उन्हें ठोक दिया जाएगा। लेकिन क्या वजह है, क्या कारण है कि अपराधी यहीं पर हैं। जो बात सदन में कही गई हो। उसके बाद भी सरकार एक बेटी की जान नहीं बचा पाई। बीजेपी सरकार में ना बेटियां सुरक्षित हैं, न सड़क पर बेटियों का सम्मान है। क्या यही भारतीय जनता पार्टी का नारा था।