प्राइवेट यूनिवर्सिटी को लेकर बनाए गए नए नियम-कानून, CM योगी ने दिए आदेश

उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों के लिए योगी सरकार ने नया अध्यादेश जारी किया है। जिसके मुताबिक, अब निजी विश्वविद्यालयों को अप्रूवल के लिए एक शपथपत्र देना होगा कि वह (यूनिवर्सिटी) किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और साथ में कैंपस में इस तरह की गतिविधियां नहीं होने दी जाएंगी।

Written by Newsroom Staff June 19, 2019 2:04 pm

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों के लिए योगी सरकार ने नया अध्यादेश जारी किया है। जिसके मुताबिक, अब निजी विश्वविद्यालयों को अप्रूवल के लिए एक शपथपत्र देना होगा कि वह (यूनिवर्सिटी) किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और साथ में कैंपस में इस तरह की गतिविधियां नहीं होने दी जाएंगी।

निजी विश्वविद्यालयों को शपथपत्र में ये भी देना होगा कि वे अपनी यूनिवर्सिटी का नाम किसी भी राष्ट्र विरोधी गतिविधि में इस्तेमाल नहीं होने देंगे। अगर ऐसा हुआ तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

जानकारी के लिए बता दें कि यूपी में मौजूदा समय में 27 निजी विश्वविद्यालय हैं। इन सभी को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2019 के अनुसार नियमों का पालन करने के लिए एक साल का समय दिया गया है। ये अध्यादेश 18 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में रखा जाएगा।

मामले पर डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है कि विश्वविद्यालयों में सिर्फ शिक्षा दी जाए न कि वहां राष्ट्र विरोध गतिविधियां पनपें।

कुलाधिपति करेंगे कुलपति की नियुक्ति
अध्यादेश के अनुसार अब निजी विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति करेंगे। कुलाधिपति शासी निकाय के परामर्श के बाद ही कुलपति के नाम पर फैसला लेंगे। आपको बता दें कि राज्य के राज्यपाल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति (चांसलर) होते हैं।

नहीं बेच सकेंगे जमीन
अध्यादेश में यह प्रस्तावित किया गया है कि विश्वविद्यालय के लिए भूमि को बेचा, हस्तांतरित या पट्टे पर नहीं दिया जा सकता है। हालांकि इसे विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए किसी बैंक या वित्तीय संस्थान को गिरवी रखा जा सकता है। विभागों में कम से कम 75 फीसदी नियमित शिक्षक रखने होंगे। कॉमन अकैडमिक कैलेंडर लागू किया जाएगा। ऐडमिशन की प्रक्रिया और फीस वेबसाइट पर दिखानी होगी।

इसके अलावा कमजोर वर्ग के छात्रों को 10 फीसदी सीटों पर 50 फीसदी शुल्क के साथ दाखिला देना होगा। राज्य उच्च शिक्षा परिषद साल में कम से कम एक बार विश्वविद्यालय का निरीक्षण करेगी।