मसीहा कौन? अयोध्या मामले पर आपस में ही भिड़ गए मुस्लिम पक्षकार

लड़ाई का बड़ा मसला वकीलों की फीस है। जमीयत दावा कर रही है कि अयोध्या मामले में वकीलों की फीस वही दे रही है। सारे कानूनी खर्चे भी उसी के हैं। मगर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

Written by: September 12, 2019 4:18 pm

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में मुसलमानों के दो बड़े पक्षकार आपस में ही भिड़ गए हैं। लड़ाई इस बात की है कि मुसलमानों का मसीहा कौन है जो बाबरी मस्जिद का मुकदमा लड़ रहा है ? उसके लिए खर्चे कौन कर रहा है और क्रेडिट किसे मिलना चाहिए ? यह लड़ाई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा ए हिंद के बिछड़ गई है।

muslim board

लड़ाई का बड़ा मसला वकीलों की फीस है। जमीयत दावा कर रही है कि अयोध्या मामले में वकीलों की फीस वही दे रही है। सारे कानूनी खर्चे भी उसी के हैं। मगर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड के मुताबिक वह वकीलों की सारी पेमेंट चेक से कर रहा है।

jamaat ulema

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि जमीअत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी अयोध्या मामले का क्रेडिट हथियाने की फिराक में हैं। हाल ही में मौलाना मदनी ने संघ प्रमुख से मुलाकात की थी। बोर्ड इसके मद्देनजर भी मुसलमानों को उनसे आगाह रहने के लिए कह रहा है।

Supreme-Court....

उधर जमीयत ने भी बोर्ड पर पलटवार कर दिया है। जमीयत के लोगों का कहना है कि बोर्ड ने बाबरी मस्जिद मामले के नाम पर मुसलमानों से खासा चंदा वसूल रखा है। अब वह इसका क्रेडिट लेने के लिए भी माहौल बना रहा है। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 अपीलें दायर हैं। इनमें से 6 याचिकाएं हिंदुओं की तरफ से हैं और 8 मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से हैं।