कार्तिक पूर्णिमा 2018: आज ही हुआ था गुरुनानक का जन्म, जानें क्या है इस दिन का महत्व

आज कार्तिक पूर्णिमा है और इस तिथि को चन्द्रमा सम्पूर्ण होता है। इस तिथि पर जल और वातावरण में विशेष उर्जा आ जाती है इसीलिए नदियों और सरोवरों में स्नान किया जाता है। कार्तिक की पूर्णिमा इतनी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि इस दिन नौ ग्रहों की कृपा आसानी से पायी जा सकती है। इस दिन स्नान,दान और ध्यान विशेष फलदायी होता है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की खास पूजा और व्रत करने से घर में यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान और गंगा स्नान का बेहद महत्व है। इस बार यह पूर्णिमा 23 नवंबर को है।

इसी पूर्णिमा के दिन सिखों के पहले गुरु नानक जी का जन्म हुआ था, जिसे विश्वभर में गुरु नानक जयंतीके नाम से मनाया जाता है। इस जयंती को गुरु पर्व और प्रकाश पर्व भी कहते हैं।

सिख धर्म के लिए भी है बड़ा महत्व-

गुरु नानक जयंती पर गुरुद्वारों में खास पाठ का आयोजन होता है। सुबह से शाम तक की‍र्तन चलता है और गुरुद्वारों के साथ ही घरों में भी खूब रोशनी की जाती है। इसके अलावा, लंगर छकने के लिए भी भीड़ उमड़ती है।

क्या है इस पूर्णिमा का महत्व

कहा जाता है कि इस पूर्णिमा तिथि पर ही भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इसलिए इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन चंद्रोदय के समय शिव जी और कृतिकाओं की पूजा करने से भगवान शंकर जल्द प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही इस दिन दीप दान का विशेष महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही संध्या काल में भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इसलिए इस दिन विष्णु जी की पूजा भी की जाती है। इस दिन गंगा स्नान के बाद दीप दान का पुण्य फल दस यज्ञों के बराबर होता है।

गंगा स्नान के बाद जरूरतमंदों को दान करना चाहिए। इस दिन मौसमी फल, उड़द दाल, चावल आदि का दान शुभ होता है।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा-विधि 

1.सुबह उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
2. अगर पास में गंगा नदी मौजूद है तो वहां स्नान करें।
3. सुबह के वक्त मिट्टी के दीपक में घी या तिल का तेल डालकर दीपदान करें।
4. भगवान विष्णु की पूजा करें।
5. श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।
6. घर में हवन या पूजन करें।
7. घी, अन्न या खाने की कोई भी वस्तु दान करें।
8. शाम के समय भी मंदिर में दीपदान करें।

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