1984 सिख दंगा मामले में दोषी सज्जन कुमार के वकील का नाम आया सामने

Written by Newsroom Staff December 17, 2018 7:16 pm

नई दिल्ली। 1984 सिख विरोधी दंगे मामले में आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीति गरमा गई है। दरअसल कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सिख विरोधी दंगों का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सज्जन को अब ताउम्र जेल में रहना होगा। अदालत के फैसले के बाद जहां भाजपा कांग्रेस पर हमलावर हो गई तो वहीं कांग्रेस भी लगातार अपना बचाव कर रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी इस मामले में घेरा है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। जेटली ने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। इस मामले में निर्णय देर में आया लेकिन न्याय मिलना शुरू हो गया है और ये बड़ी बात है। जेटली ने कहा, ये विडम्बना है कि ये फैसला आया उस दिन है जब सिख समाज जिस दूसरे नेता को दोषी मानता है कांग्रेस उसे ही मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला रही है।

इसके बाद कमलनाथ और कांग्रेस के बचाव में कपिल सिब्बल मैदान में उतर आए। उन्होंने अपनी पार्टी का बचाव करते हुए कहा, कमलनाथ पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। कमलनाथ के सीएम चुने जाने के सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा, भाजपा इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए। सज्जन कुमार अब किसी पद पर नहीं हैं।Kapil Sibal

कपिल सिब्बल जिस तरह से पार्टी का बचाव करते नजर आ रहे हैं उसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि उनका बेटा अमित सिब्बल सज्जन कुमार की तरफ से बचाव पक्ष के वकील के तौर पर मुकदमा लड़ रहे थे।

ऐसे में सज्जन कुमार का कपिल सिब्बल कनेक्शन खुलकर जनता के सामने आ गया है। अदालत की तरफ से सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उन्हें 31 दिसंबर तक सरेंडर करने को कहा गया है। उम्रकैद के अलावा सज्जन कुमार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा बाकी दोषियों को जुर्माने के तौर पर एक-एक लाख रुपये देने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, कपिल सिब्बल के बेटे अमित सिब्बल, सज्जन कुमार का केस लड़ रहे थे। ताजा जानकारी के मुताबिक, सज्जन कुमार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

क्यों हुए थे दंगे?

1984 में इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद देश के कई शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। कहा जाता रहा है कि कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता इसमें सक्रिय रूप से शामिल थे। इंदिरा गांधी की हत्या सिखों के एक अलगाववादी गुट ने उनके द्वारा अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में करवाई गई सैनिक कार्रवाई के विरोध में कर दी थी।

भारत सरकार की ऑफिशियल रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे भारत में इन दंगों में कुल 2800 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें से 2100 मौतें केवल दिल्ली में हुई थीं। सीबीआई जांच के दौरान सरकार के कुछ कर्मचारियों का हाथ भी 1984 में भड़के इन दंगों में सामने आया था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे।